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सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अपना कृषि कानून बनाने का निर्देश दिया

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों को दरकिनार करते हुए नया कानून बनाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए कहा है।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी एक बयान में राज्यों को बताया गया है कि वो आर्टिकल 254 (2) के तहत कानून पारित करें जो केंद्र द्वारा राज्यों के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करने की स्थिति में उसको दरकिनार कर उसे कानून बनाने की छूट देता है।

दरअसल संविधान का आर्टिकल 254 (2) मूल रूप से राज्य सरकार को समवर्ती सूची में दिए गए किसी भी ऐसे विषय पर कानून बनाने का अधिकार देता है जिसका केंद्र के कानून से अंतरविरोध हो। लेकिन इसमें यह एक शर्त शामिल होती है कि उसको राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाए। 2014 के आखिर में राजस्थान की बीजेपी सरकार ने केंद्र के श्रम कानूनों- फैक्टरी एक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट और कांट्रैक्ट लेबर एक्ट- में बदलाव के लिए इस रास्ते को अपनाया था। और बाद में उसे राष्ट्रपति की सहमति भी मिल गयी थी।

बयान में कहा गया है कि “यह राज्यों को एमएसपी समाप्त करने और एपीएमसी को छिन्न-भिन्न करने समेत अस्वीकार्य किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को बाईपास करने का कांग्रेस शासित राज्यों को अधिकार दे देगा”।

द हिंदू के मुताबिक पंजाब की अमरिंदर सिंह सरकार ने इस लाइन पर काम करना शुरू कर दिया है। वह एपीएमसी एक्ट में बदलाव पर विचार कर रही है और पूरे राज्य को प्रमुख मंडी यार्ड में बदलने की घोषणा करनी है। यह कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (प्रोमोशन और संवर्धन), एक्ट, 2020 के रास्ते में गतिरोध खड़ा कर देगा जिसे हाल में संसद से पारित किया गया है। मंडी यार्ड की घोषणा इस बात को सुनिश्चित करती है कि उसके घेरे के बाहर किसी भी तरह की खरीद को अवैध माना जाएगा। किसानों को एसएसपी से नीचे कीमत नहीं मिलती है। और राज्यों को अपनी मंडी फीस मिलती है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हाल में कहा था कि उनकी सरकार इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाएगी कि निजी खिलाड़ी कृषि क्षेत्र में नहीं घुस सकें। छत्तीसगढ़ में कम से कम 40 फीसदी धान की उपज को एफसीआई केंद्रीय पूल के हिस्से के तौर पर खरीदता है। जबिक पंजाब और हरियाणा के उलट यहां 86 फीसदी जमीन की होल्डिंग 5 एकड़ से कम है।

इसके अलावा कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। जिसमें वह तीनों कानूनों को चुनौती देगी। इस मामले में केरल की सरकार ने पहल भी कर दी है। जिसका पंजाब सरकार ने साथ देने का वादा किया है।

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This post was last modified on September 28, 2020 11:24 pm

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