Friday, April 19, 2024

ग्राउंड रिपोर्ट: चीनी मिल का टरबाइन फेल होने से 4 दिनों से भटक रहे गन्ना किसान 

फर्रुखाबाद। “साहब जी, चार दिनों से हम ट्राली लेकर खड़े हैं। गन्ने का तौल कराने के लिए, लेकिन अभी तक न तो तौल हो पायी है और ना ही बताया जा रहा है कि कब तक तौल हो जायेगा।” यह कहना है अर्जुन सिंह नंगला गांव के रहने वाले सुधीर सिंह यादव का जो 27 नवंबर 2023 से गन्ना लदे ट्रैक्टर ट्राली को लेकर चीनी मिल के बाहर तौल के इंतजार में घंटे और दिन गिनते हुए चार दिन गुजार चुके हैं।

यह समस्या सिर्फ सुधीर सिंह यादव की नहीं है, बल्कि सैकड़ों उन किसानों की है जो चीनी मिल के बाहर पेराई सत्र शुरू होने की सूचना मिलने के बाद से ही अपने खेतों से गन्ने का गट्ठर बांधकर ट्रैक्टर ट्राली, बैलगाड़ी इत्यादि वाहनों से मिल गेट पर पहुंच कर तौल की प्रतीक्षा में दिन और रात गुजारने को विवश हुए हैं। लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी उनके गन्ने का तौल तो दूर रहा अभी तक यह तसल्ली दिलाने वाला कोई नहीं रहा है जो यह बता सके कि कब तक गन्ना तौल हो सकता है।

 दशकों पुराने मशीनों से होती है गन्ना पेराई

महंगी होती जा रही खेती, खासकर गन्ना खेती से मुंह मोड़ते जा रहे किसानों को चीनी मिलों की विभिन्न तकनीकी समस्याओं से भी जूझना पड़ जा रहा है। यही कारण है कि जिन किसानों का थोड़ा बहुत जो लगाव गन्ना खेती से बना हुआ है वह भी अब टूटा हुआ नजर आने लगा है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में गन्ना किसानों के लिए किसी जमाने में मुफ़ीद रही चीनी मिलों का एक-एक कर बंद होने या निजी हाथों में चले जाने के कारण गन्ना की खेती से किसानों का मोह भंग होना शुरू होने लगा था। कुछ ऐसी स्थिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चीनी मीलों की बताई जा रही हैं। वज़ह बताया जा रहा है कि अधिकांश चीनी मिलों में दशकों पुरानी मशीनों के सहारे गन्ना पेराई किया जा रहा है जो कब जवाब दे जाए, कब कौन सा पार्ट, कल-पुर्जे जवाब दे जाएं कहा नहीं जा सकता है। कायमगंज, फर्रूखाबाद की चीनी मिल भी इसी की एक कड़ी है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद का कायमगंज कस्बा यहां की तकरीबन पांच दशक पुरानी चीनी मिल, जाहिर सी बात है चीनी मिल पुरानी तो मशीन और कल पुर्जे भी बूढ़े हो चले होंगे। मिल सरकारी है तो फिर क्या पूछना, जंग भी लगे होंगे। वैसे भी कायमगंज, फर्रुखाबाद चीनी मिल की दरो-दीवार अपनी दास्तान कहने-दिखाने के लिए काफी हैं।

 पेराई सत्र शुरू होते ही खराब हुई टरबाइन, पेराई ठप्प

कायमगंज स्थित ‘दि किसान सहकारी चीनी मिल्स’ में 27 नवंबर से पेराई सत्र शुरू होने वाला था कि ऐन वक्त पर चीनी मिल के टरबाइन ने हाथ खड़े कर दिए, जिससे पेराई ठप्प हो गया। इससे जहां मिल प्रबंधन के माथे पर पसीना आने लगा तो बाहर तौल के लिए खड़े गन्ना किसानों की परेशानी बढ़ गई थी। पहले दिन तो किसी तरह किसानों को जल्द ही मशीन के चालू होने का भरोसा दिलाया गया, लेकिन पेराई सत्र का पहला दिन बीतने और फिर दूसरे और तीसरे के बाद चौथा दिन भी बीत जाने से उनमें बेचैनी देखने को मिल रही है।

लोहिया गांव से आए गन्ना किसान राहुल कुमार का कहना है कि “वह गन्ना मिल शुरू होने की जानकारी के बाद 28 नवंबर से खड़े हैं, तीन दिन बीतने को हैं अभी तक कोई बताने वाला नहीं है कि कब तक तौल प्रारंभ हो जाएगा। पूछे जाने पर बस यही कहा जा रहा है कि कुछ ही समय में तौल प्रारंभ हो जाएगा, बस धैर्य बनाए रखें।” अब इस धैर्य को कब तक बनाए रखना है यह बताने वाला कोई नहीं है।

वहीं चीनी मिल में काम करने वाले एक कर्मचारी की माने तो “चीनी मिल प्रबंधन पुरानी मशीनों के सहारे पेराई सत्र को शुरू कर अंजाम तक पहुंचना चाहता है, जबकि मिल के कल पुर्जों की सही ढंग से साफ-सफाई और निरंतर देखभाल, रख-रखाव ना किए जाने से 2 घंटे बाद ही मशीन की टरबाइन फेल होने पर गन्ना पेराई का कार्य भी ठप हो गया। आलम यह है कि मिल के बाहर सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्रालियों और बैल गाड़ियों में गन्ना लादकर खड़े हैं। जिनके गन्ने की तौल तक नहीं हो रही है। कुछ किसानों ने तो बाकायदा मिल के बाहर ही डेरा डाल रखा हुआ है और वहीं चूल्हा जलाकर भोजन पानी कर रहे हैं।”

बरती जाती है लापरवाही

चार दिनों से गन्ने का तौल कराने के लिए खड़े किसानों का आरोप है कि गन्ना पेराई चालू करने के लिए मिल प्रशासन ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया है। यही कारण कि पेराई सत्र शुरू होते ही यह समस्या उत्पन्न हुई है। यदि पेराई शुरू होने से पहले चीनी मिल के मशीनों की ट्रायल की गई होती तो शायद यह स्थिति न उत्पन्न होती। हालांकि टरबाइन में खराबी आने की वजह से उसकी मशीन के एक पुर्जे को मेरठ सही होने के लिए भेजे जाने की बात तो कही जा रही है, लेकिन यह कब तक बन कर आ जायेगा इसे नहीं बताया जा रहा है। जिससे गन्ना तौल शुरू न होने से किसान गन्ना लेकर इस ठंड में मिल के बाहर रात गुजारने को विवश हो रहे हैं। 

बताते चलें कि 27 नवंबर, 2023 को दि सहकारी चीनी मिल्स कायमगंज का जिलाधिकारी फर्रूखाबाद ने बाकायदा पेराई सत्र का शुभारंभ किया था। लेकिन मिल के चलते ही टरबाइन ने जवाब दे दिया।

सूख रहे गन्ने का कौन होगा जिम्मेदार

गन्ना किसानों को राहत देने की बात तो सरकारें करती हैं, लेकिन वह मिलती नहीं हैं। राहत के नाम पर किसान सिर्फ छला जाता है। कायमगंज चीनी मिल के बाहर पिछले चार दिनों से गन्ना लदा ट्रैक्टर ट्राली लेकर तौल प्रारंभ होने की ओर टकटकी लगाए योगेन्द्र का दर्द है कि “खेतों से कटने के बाद देर से गन्ना लाने पर गन्ना सूखा होने का उलाहना देते हुए मिल प्रबंधन द्वारा नाराजगी जताई जाती है, वहीं हम चार दिनों से मिल गेट के बाहर गन्ना लेकर खड़े हैं तो भला इसका जिम्मेदार कौन होगा? के सवाल पर जिम्मेदार हाथ खड़े कर जवाबदेही से कतराते हुए नज़र आ रहे हैं।”

इंदिरा गांधी ने रखी थी आधारशिला

दि किसान सहकारी चीनी मिल्स कायमगंज का शिलान्यास 9 जनवरी, 1974  को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। जिसका उद्घाटन उन्हीं के जन्मदिन के अवसर पर बुधवार, 19 नवंबर  1975 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे हेमवती नन्दन बहुगुणा ने तत्कालीन वित्त, उघोग, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित हुए कार्यक्रम के बीच करते हुए गन्ना किसानों के लिए समर्पित किया था। 

पुरानी मशीनों के सहारे होती है पेराई

कहने को तो दम तोड़ती गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार गन्ना की खेती और गन्ना किसानों के बेहतरी के लिए दृढ़ संकल्पित होने की बात करती है, लेकिन देखा जाए तो चीनी मिल्स में पेराई को चालू करने के लिए एक बड़ी समस्या है। वह है पुरानी मशीनों के सहारे मिल कर्मियों को लगने के बाद भी कई-कई दिन तक तकनीकी खराबी से पेराई ठप्प हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अभी शुरूआती दौर में ही यह हाल है तो आगे क्या होगा? अभी पूरी तरह से पेराई सत्र शुरू भी नहीं हो पाया था कि मशीनें खराब होना शुरु हो गई हैं। जबकि पेराई सत्र चालू होते ही मिल में किसान गन्ना लाना शुरू कर चुके हैं।

इसके पीछे किसानों का तर्क है कि पेराई सत्र शुरू होने के साथ-साथ खेतों में धान की कटाई-पिटाई से लेकर रवि की फसलों की भी तैयारी होने लगी है। गन्ने का खेत खाली होने से कुछ और सहायक खेती को किया जा सकता है। दूसरी ओर चीनी मिल के बाहर खुले मैदान में गन्ने की आवक बढ़ती जा रही है। पेराई ठप्प हो जाने से दो-तीन दिनों से तौल भी बंद होने से किसानों के लिए मुसीबत बढ़ गई है। किसान तौल के इंतजार में परेशान देखे जा हैं। किसानों की माने तो इस बार पहले की अपेक्षा ज्यादा हालात खराब है। गन्ना किसानों का कहना है कि “उन्हें भी खेतों और घरों तक ढेरों कार्य पड़े हुए हैं। नाते-रिश्तेदार, पास-पड़ोस व परिवार में शादी होने वाली हैं, ऐसे में उन्हें घर जाने की जल्दी हैं। वह कितने दिन यहां गुजारें, कब तक पेराई शुरू होगी, कब से गन्ने का तौल शुरू होगा कोई बताने को तैयार नहीं है।” ऐसे में इस ठंड के मौसम में खुले आसमान के नीचे समय गुजारने को मजबूर हुए किसानों में आक्रोश बढ़ता नज़र आ रहा है।

(कायमगंज, फर्रुखाबाद से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट।) 

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