Monday, April 15, 2024

रोजगार को लेकर युवाओं की हताशा मोदी के तीसरे कार्यकाल की महत्वाकांक्षा पर विराम लगा सकती है

बिहार में तेजस्वी यादव की जनविश्वास यात्रा में नौकरी के सवाल पर उमड़ने वाली अपार भीड़ और उत्तरप्रदेश में पेपर लीक कांड के खिलाफ युवाओं का आक्रोश जिसके आगे घुटने टेककर योगी सरकार को कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा रद्द करनी पड़ी, संकेत है कि युवाओं की रोजगार और नौकरियों को लेकर बेचैनी आम चुनाव में अहम मुद्दा बनने जा रही है। 

जहां बिहार में तेजस्वी यादव और महागठबंधन ने अपने वायदे के मुताबिक लाखों युवाओं को नौकरी देकर उनका विश्वास जीत लिया है और नीतीश कुमार के पाला बदल को धता बताते हुए सामाजिक-राजनीतिक सन्तुलन अपने पक्ष में मोड़ लिया है, वहीं उत्तरप्रदेश में योगी सरकार युवाओं के गुस्से के निशाने पर है। वह रोजगार तो नहीं ही दे सकी, ईमानदारी से स्वच्छ भर्ती परीक्षाएं भी नहीं करवा पाई।

हाल ही में उत्तरप्रदेश में हुआ पेपर लीक कांड  योगी जी के राज में यह 8वां परीक्षा लीक कांड है! कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक से प्रदेश के 48 लाख से ज्यादा नौजवानों का भविष्य अधर में लटक गया है। स्वाभाविक है इसे लेकर प्रतियोगी छात्रों-युवाओं में जबरदस्त उबाल था। हजारों हजार युवा निराशा और गुस्से में इलाहाबाद से लेकर लखनऊ तक सड़कों पर उतरे। योगी सरकार पहले तो पेपर लीक हुआ है, यह मानने को ही तैयार नहीं थी, पर अंततः भारी युवा आक्रोश के आगे घुटने टेकने को मजबूर हुई और परीक्षा निरस्त हुई।

RO/ARO के परीक्षा लीक को लेकर 26 फरवरी को राज्य सेवा आयोग कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे प्रतियोगी छात्रों पर प्रयागराज में पुलिस ने बल प्रयोग किया। दरअसल, सचिवालय, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तथा UPPSC में RO/ARO के 411 पदों के लिए 11 फरवरी को 58 जिलों के2000 केंद्रों में परीक्षा हुई थी, लेकिन परीक्षार्थियों के अनुसार उसका पेपर लीक हो गया था। इसमें लगभग 11 लाख छात्र पंजीकृत थे। सरकार ने 27 फरवरी तक शिकायत दर्ज कराने और जांच की बात की थी। प्रतियोगी छात्र पुलिस भर्ती परीक्षा की तरह RO/ARO परीक्षा को भी निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

तात्कालिक तौर पर प्रतियोगी छात्र भले ही अपने कमरों में वापस लौट जाएं, पर जाहिर है परीक्षा निरस्त हो, इसके लिए वे परीक्षा में नहीं बैठे थे। वे तो नौकरी चाहते थे और उसका अब क्या होगा, कोई नहीं जानता। योगी सरकार ने कहा है कि कॉन्स्टेबल परीक्षा अब 6 महीने बाद होगी! लेकिन जिस तरह भर्ती परीक्षाएं चुनाव के ठीक पहले करवाने का 5 साला कैलेंडर चल रहा है, उसमें कोई भी अब इस पर आश्वस्त नहीं हो सकता। दरअसल पुलिस की यह भर्ती भी 5 साल के बाद आई थी, शायद चुनावी लाभ के लिए इन खाली पदों को रोक कर रखा गया था।

सरकार के इस रुख ने नौजवानों को बेहद हताश कर दिया है। इसकी ही बानगी दिखी जब पेपर लीक सामने आने के बाद कन्नौज जिले के 28 वर्षीय बेरोजगार युवा ब्रजेश पाल ने फांसी लगाकर अपने घर में आत्महत्या कर लिया। आत्महत्या के पूर्व उन्होंने अपने सभी शिक्षा प्रमाणपत्र जला दिए। अपने सुसाइड नोट में, ब्रजेश ने इस कदम के पीछे बेरोजगारी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लिखा था कि उनकी आधी जिंदगी पढ़ाई में गुजर गई,  “अब मैं परेशान हूं। जब नौकरी नहीं मिल सकती तो डिग्री का क्या फायदा।”  खबर के अनुसार पाल के पिता दिल्ली में किसी निजी कंपनी में काम करते हैं और उनके पास गांव में चार बीघा जमीन है। वह अपने माता-पिता की इकलौती सन्तान थे।

नौजवान ब्रजेश पाल के दुखांत में पूरी युवा पीढी का दर्द छुपा हुआ है। उन्हें अपनी पढ़ाई, डिग्री सब व्यर्थ लगने लगी है। युवाओं की हताशा और सरकार से नाराजगी गहराती जा रही है।

दरअसल यह अब एक पैटर्न बन गया है। नौकरियों के लिए भर्ती  पहले तो विज्ञपित ही नहीं होती, फिर लम्बे समय तक प्रायः अगला बड़ा चुनाव आने तक उसकी परीक्षा लटकी रहती है, और परीक्षा होती है तो पेपर लीक हो जाता है या मामला न्यायालय में चला जाता है.. । कुल मिलाकर नतीजा यह होता है कि फाइनल भर्ती के लिए छात्र सालों-साल भटकते रहते हैं।

योगी जी के राज में यह 8वां परीक्षा लीक कांड है। मार्च 2017 में योगी सरकार बनने के 4 महीने के अंदर पहला पेपर लीक कांड हुआ। 25-26 जुलाई 2017 को UPPR&PB द्वारा आयोजित इंस्पेक्टर्स ऑनलाइन रिक्रूटमेंट टेस्ट परीक्षा से पहले ही स्थगित कर दिया गया क्योंकि वह लीक होकर व्हाट्सएप पर घूमने लगा था। 1.2 लाख परीक्षार्थी इससे प्रभावित हुए। फरवरी 2018 में UP पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया।

2 सितम्बर 2018 को होने वाली ट्यूबवेल ड्राइवर परीक्षा का पेपर लीक हो गया। इसे UP Subordinate Services Commission ने आयोजित किया था। UPTET 2021 की परीक्षा स्थगित कर दी गयी क्योंकि उसका पेपर लीक हो गया था। इसी तरह PET की परीक्षा का भी पेपर लीक हो गया था।

प्रदेश में कानून व्यवस्था का कीर्तिमान बनाने का दावा करने वाले योगी जी के बुलडोज़र राज में,  क्या यह चौंकाने वाला नहीं है? योगी जी का तो दावा था कि उनके राज में माफिया या तो जेल में होंगे या प्रदेश छोड़ कर भाग जाएंगे। जाहिर है पेपर-माफिया द्वारा ये आठ-आठ पेपर लीक कांड उनके दांवों के खोखलेपन के सबूत हैं। क्या इतने बड़े पैमाने पर लगातार होने वाले पेपर लीक शासन-प्रशासन की मिली भगत के बिना सम्भव हैं?

80-90 के दशक में एक बार इलाहाबाद में सिविल सर्विस परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। उसको लेकर छात्रों का जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा था। छात्रों की मांग और दबाव में तत्कालीन केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश दिया और UPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक को जेल जाना पड़ा था। उसके बाद से लम्बे समय तक ऐसे कांड नहीं हुए।

यह भी कम रहस्यमय नहीं है कि आखिर इतने पदों को इतने लंबे लम्बे समय तक लटका कर क्यों रखा जा रहा है। क्या स्थायी नौकरियों से कर्मचारियों के वेतन व अन्य मदों में होने वाले खर्च से बचने के लिए पदों को लंबे समय तक खाली रखा जा रहा है और कम वेतन पर संविदा कर्मियों से काम चलाया जा रहा है? क्या ऐन चुनाव के पहले भर्तियां निकालकर युवाओं को चुनावी लाभ के लिए लुभाने के लिए रिश्वत के बतौर इन भर्ती परीक्षाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

जब से मोदी जी सत्ता में आये हैं, देश में कुल 70 पेपर लीक हो चुके हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 से 2022 तक 22 करोड़ युवाओं ने परीक्षा दी, जिसमें मात्र 7.22 लाख को नौकरी मिल पाई!

2019 से 2022 के बीच सरकार द्वारा चयनित उन 2 लाख युवाओं के साथ हुए अन्याय और उनकी पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो Joining letter का इंतजार कर रहे थे, लेकिन तभी सरकार ने 31 मई 2022 को अग्निवीर स्कीम की घोषणा कर दिया, और वे सेना में मिली स्थाई नौकरी से वंचित हो गए !

यह स्वागतयोग्य है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने पर अग्निवीर योजना को रद्द करने और पहले की तरह सेना में स्थायी भर्ती बहाल करने का ऐलान किया है।

युवा मंच और तमाम छात्र-युवा संगठनों की ओर से यह लोकप्रिय मांग उठाई जा रही है कि रोजगार को मौलिक संवैधानिक अधिकार बनाया जाय, देश में 1 करोड़ नौकरियों के खाली पदों को समयबद्ध ढंग से भरा जाय तथा हर परिवार से कम से कम एक सदस्य को नौकरी की गारंटी की जाय।

डरी सरकार ने रोजगार के सवाल पर AISA-RYA तथा अन्य संगठनों द्वारा आयोजित Young India रैली को 28 फरवरी को जंतर-मंतर पर करने की इजाजत नहीं दी।

देश में बेरोजगारी का संकट आज जो विस्फोटक आयाम ग्रहण कर चुका है, उसमें विपक्ष अगर इस सवाल को लोकप्रिय और convincing ढंग से उठा सका और सत्ता में आने पर इसे हल करने का ठोस आश्वासन दे सका तो यह भाजपाई रणनीतिकारों की सारी व्यूहरचना पर भारी पड़ सकता है और मोदी के तीसरे कार्यकाल की महत्वाकांक्षा पर विराम लगा सकता है।

(लाल बहादुर सिंह, पूर्व अध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ)

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