आंदोलनरत किसानों पर सेना स्तर के हथियारों का इस्तेमाल हुआ; याचिका दायर

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पंजाब के किसान संगठन लगातार कह रहे हैं कि 21 फरवरी को पंजाब-हरियाणा सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने के लिए हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन हथियारों का इस्तेमाल किया; जो फ़ौज के पास होते हैं। 21 फरवरी को हुए संघर्ष में पंजाब के युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत हरियाणा पुलिस की ओर से चलाई गई गोली से हो गई थी। तब से यह मामला ख़ासा गर्माया हुआ है।

इस बाबत वरिष्ठ किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू ) के अध्यक्ष बलवीर सिंह राजेवाल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाख़िल करते हुए मांग की है कि बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों के जीवन और संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए तत्काल न्यायिक जांच कराई जाए। याचिका में कहा गया है कि निहत्थे किसानों पर सेना स्तर के हथियार इस्तेमाल किए गए।

बलबीर सिंह राजेवाल ने जनहित याचिका में बताया कि हरियाणा सरकार के आदेश पर वहां की पुलिस और सीआरपीएफ ने पंजाब के क्षेत्र में प्रवेश कर आंदोलनरत किसानों पर हिंसात्मक कार्रवाई की थी। इसमें कई किसानों की जान चली गई और 250 से अधिक किसान गंभीर रूप से ज़ख्मी हो गए। पैलेट गन के इस्तेमाल की वजह से कई किसानों ने अपनी दृष्टि और अंग खो दिए हैं। अंधाधुंध गोलीबारी की वजह से किसानों की संपत्ति; जैसे ट्रैक्टर, ट्रॉली, कार, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों को भारी नुकसान हुआ।

याचिका में कहा गया है कि हरियाणा की ओर से की गई इस हिंसक कार्रवाई पर पंजाब सरकार व राज्य पुलिस ख़ामोश रही। राजेवाल ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन इन निहत्थे किसानों पर चौतरफ़ा फायरिंग की गई। हरियाणा सरकार के आदेश पर पुलिस द्वारा किए गए नुक़सान की जांच दोनों राज्य की सरकारें नहीं कर सकती हैं। ऐसे में हरियाणा पुलिस द्वारा किए गए अवैध कृत्यों की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्च न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग गठित किया जाए। 

 उधर, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन एक याचिका में एडवोकेट उदय प्रताप की तरफ से अर्जी दायर करके कहा गया है कि अंबाला पुलिस को आंदोलन में शामिल किसानों के वीज़ा व पासपोर्ट कैंसिल करने से रोका जाए। किसानों का दिल्ली कूच हिंसात्मक नहीं है। ऐसे में किसानों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। इस अर्जी पर मुख्य याचिका के साथ ही 7 मार्च को सुनवाई होगी।

(पंजाब से अमरीक की रिपोर्ट)

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