हिंसा और अविश्वास के बीच मैतेई और कुकी बच्चे कैसे पढ़ें एक साथ? 316 छात्रों ने कॉलेज बदलने का किया अनुरोध

Estimated read time 1 min read

नई दिल्ली। मणिपुर में छह महीने पहले शुरू हुई जातीय हिंसा अभी तक पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सका है। राज्य में अकसर एक-दो लावारिश लाशें मिलती रहती हैं। दरअसल, कुकी और मैतेई समुदाय एक दूसरे समुदाय के लोगों को अकेला पाने पर हमला कर मार गिराने की ताक में रहते हैं। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो गई है कि अब वह एक संस्थान में दूसरे के साथ काम करना और स्कूलों-कालेजों में एक साथ पढ़ने-पढ़ाने को तैयार नहीं हैं। डर दोनों तरफ से है। राज्य और केंद्र सरकार इस डर को खत्म करने की जगह इसे और बढ़ा रहे हैं।

ताजा मामले में कुकी और मैतेई छात्रों ने पहाड़ी और घाटी के स्कूलों से अपना स्थानांतरण करने की मांग की है। सूचना के मुताबिक राज्य में अशांति के कारण इंफाल घाटी के कुल 252 छात्रों ने पहाड़ी जिलों के कॉलेजों में स्थानांतरण की मांग की है, जबकि 64 अन्य ने पहाड़ी जिलों से घाटी के कॉलेजों में स्थानांतरण की मांग की है।

छह महीने पुराने जातीय संघर्ष के कारण आदिवासी कुकी-ज़ो समुदाय मैतेई-बहुल घाटी में नहीं आना चाहते तो   मैतेई समुदाय के लोग आदिवासी-बहुल पहाड़ी जिलों में जाने से कतरा रहे हैं। दोनों समुदायों के इस रवैए के   परिणामस्वरूप कुकी-ज़ो और मैतेई क्षेत्र का लगभग पूर्ण सीमांकन हो गया।  

राज्य की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने शनिवार रात दो पेज के मीडिया बयान में स्थानांतरण चाहने वाले 316 कॉलेज छात्रों का आंकड़ा दिया, जिसमें कहा गया कि ऐसे स्थानांतरण की सुविधा दी जा रही है।

बयान में कहा गया है कि यह सब “मई के पहले सप्ताह में शुरू हुए हिंसक संघर्ष के कारण विस्थापित छात्रों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने” के लिए उठाए जा रहे विभिन्न कदमों में से एक है।   

उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि मणिपुर विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के उन छात्रों के लिए ऑनलाइन सुविधाओं की व्यवस्था की है जो संघर्ष के कारण कक्षाओं में उपस्थित होने में असमर्थ हैं।

इसमें कहा गया है कि चुराचांदपुर और अन्य पहाड़ी जिलों में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए भौतिक कक्षाओं की व्यवस्था करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

बयान में कहा गया है कि प्रभावित छात्रों को उन दस्तावेज़ों को प्रस्तुत किए बिना अस्थायी प्रवेश सुरक्षित करने की अनुमति दी जाएगी जो संघर्ष में खो गए या क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

इसमें कहा गया है, “मुख्यमंत्री कॉलेज छात्र पुनर्वास योजना, 2023 के तहत, एक छात्र को एक कॉलेज से उसकी पसंद के दूसरे कॉलेज में स्थानांतरण की अनुमति है।”

“अब तक, 252 छात्रों ने वैली कॉलेजों से हिल कॉलेजों में स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है और 64 छात्रों ने हिल कॉलेजों से वैली कॉलेजों में स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। उन्हें अपनी पसंद के कॉलेजों में दाखिला लेने की अनुमति दी गई है। उनके नए कॉलेज का नवीनीकरण का रिकॉर्ड शीघ्र ही मणिपुर विश्वविद्यालय में किया जाएगा।”

बयान में कहा गया है कि मणिपुर विश्वविद्यालय अनुरोध पर जले, क्षतिग्रस्त या खोए हुए दस्तावेजों को फिर से तैयार करेगा।

कुकी-ज़ो सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एक अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं। समुदायों के बीच गहराते अविश्वास और छिटपुट हिंसा ने राज्य को खतरे में डाल दिया है।

संघर्ष को समाप्त करने के लिए दोनों समुदायों के बीच किसी सरकार या नागरिक समाज संगठन द्वारा शुरू की गई बातचीत के बहुत कम संकेत हैं।

सरकारी बयान तब जारी किया गया जब कुकी-ज़ो सुमदाय के छात्रों ने चुराचांदपुर में एक विशाल “शिक्षा लापरवाही के खिलाफ मार्च” आयोजित किया, ताकि उन्हें लगातार अशांति के कारण होने वाली पीड़ा से अवगत कराया जा सके और बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए “वैकल्पिक व्यवस्था” की मांग की जा सके।

 अतिरिक्त सचिव (उच्च और तकनीकी शिक्षा) निवेदिता लैरेनलाकपम द्वारा हस्ताक्षरित सरकारी  बयान में कहा   है कि “व्यक्तिगत छात्रों के अनुरोध को पूरा करने के लिए, संबंधित डीसी के कार्यालय में एक हेल्प डेस्क बनाई गई है।”

इसमें कहा गया है कि सरकार ने विस्थापित स्कूली बच्चों की जरूरतों की देखभाल के लिए जून से प्रत्येक राहत शिविर के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। 98 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों को पास के स्कूलों में फिर से दाखिला दिया गया और पाठ्यपुस्तकें, नोटबुक, स्टेशनरी और खेल किट सहित अन्य चीजें प्रदान की गईं।

सरकार ने उपायुक्तों को अनंतिम माइग्रेशन प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार दिया है, जबकि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, मणिपुर ने ऑनलाइन आवेदन और माइग्रेशन प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति दी है। सीबीएसई ने मणिपुर में अपने संबद्ध स्कूलों को उपायुक्तों द्वारा जारी अनंतिम प्रवास प्रमाणपत्र स्वीकार करने की अनुमति दी है।

(जनचौक की रिपोर्ट।)

You May Also Like

More From Author

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments