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बिहार: चुनाव से पहले केंद्र ने खड़ा किया नीतीश के सामने सृजन घोटाले का भूत

बिहार में अक्टूबर-नवंबर माह में चुनाव होने वाले हैं। लेकिन एनडीए के अंदर खाने जो चल रहा है उससे तो यही लग रहा है कि आज जो राजनीतिक परिदृश्य दिख रहा है वैसा चुनाव घोषणा के साथ या उसके पूर्व पूरी तरह बदल सकता है। विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में फिर नये समीकरण बन सकते हैं। नीतीश कुमार और राम विलास पासवान के बीच ठनी हुई है। रामविलास पुत्र चिराग पासवान मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार पर हमलावर हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने भले ही गृहमंत्री अमित शाह, बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा की है, पर बिना भाजपा की शह के चिराग पासवान नीतीश कुमार के खिलाफ जहर नहीं उगल सकते। इस बीच भाजपा की नीयत में खोट एक और तथ्य से पता चल रहा है कि अचानक बिहार के भागलपुर जिले में हुए अरबों रुपए के चर्चित सृजन घोटाला कांड में सीबीआई ने नीतीश कुमार के चहेते आईएएस केपी रमैय्या समेत 60 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इसकी टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

रमैया, नीतीश की पार्टी और उनकी सरकार से जुड़े पहले व्यक्ति हैं जिन्हें घोटाले में चार्जशीट किया गया था। यह, ऐसे समय में जब नीतीश एनडीए के अन्य सहयोगियों- भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ अपनी पार्टी के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर सख्त सौदे बाजी में लगे हैं। लोजपा ने लगभग 35 से 40 सीटों पर अपना दावा ठोक दिया है और उसके प्रमुख, चिराग पासवान, शासन के मुद्दे पर नीतीश पर लगातार हमला कर रहे हैं। बिहार में नवंबर से ठीक पहले होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले सीबीआई की चार्जशीट ने सत्ताधारी खेमे में तूफान खड़ा कर दिया है।

रमैया भागलपुर के दूसरे पूर्व जिला मजिस्ट्रेट हैं, जो सृजन घोटाला के तंत्रिका केंद्र हैं । रमैया के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने विशेष रूप से सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के रैंक में “चिंता” पैदा की है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रमैया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के “नीली आंखों वाले” अधिकारी थे। नीतीश की रमैया के प्रति  पसंदगी इससे स्पष्ट है कि मूल रूप से आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले आईएएस अधिकारी, स्वैच्छिक रूप से सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद जदयू में शामिल हुए और सासाराम से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की मीरा कुमार के खिलाफ 2014 में चुनाव लड़ा। सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि रमैया ने सृजन महिला विकास समिति (एसएमवीएस) के खाते में 3.50 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन जमा किए और आरबीआई के निर्देशों का उल्लंघन और अन्य निर्धारित नियम की अनदेखी करते हुए भागलपुर के सबौर ब्लॉक कार्यालय के परिसर में अपनी दुकानें खोलने के लिए इसे सार्वजनिक स्थान आवंटित किया। इससे ऐसा आभास हुआ कि यह सरकारी संस्था है ।

अब केंद्र सरकार का तोता सीबीआई जब नीतीश के “विश्वसनीय” अधिकारी और उनकी पार्टी के आदमी के खिलाफ चार्जशीट करती है तो इसके राजनीतिक निहितार्थ तो निकलेंगे ही। चिराग नीतीश के खिलाफ भाजपा की रणनीति को उनके चारों ओर कसने की रणनीति के रूप में देखते हैं। नीतीश को कम से कम 120 सीटों के लिए मोलभाव करने में लगे हैं, लेकिन भाजपा के थिंक टैंक को लगता है कि नीतीश कोविद -19 की स्थिति को ठीक से सम्भाल नहीं सके इसलिए उनके खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी का माहौल बन सकता है । इसके अलावा, सृजन घोटाला, जो बिहार में अब तक का सबसे बड़ा, ईमानदारी का “टैग” है उस पर सीधा चोट कर रहा है।

बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की घटक लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज बताए जा रहे हैं। चिराग की नाराजगी का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि एनडीए को अटूट कहने वाले मुंगेर के एलजेपी जिलाध्यक्ष की छुट्टी कर दी गई है। एलजेपी के सूत्रों का कहना है कि चिराग की नाराजगी नीतीश कुमार के रवैये को लेकर है। चिराग की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनके किसी भी आग्रह को नीतीश स्वीकार नहीं करते हैं। माना जाता है कि इसी के चलते चिराग कई मुद्दों को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधते रहते हैं।

चिराग ने बिहार में कानून व्यवस्था का मामला हो या प्रवासी मजदूरों का मामला नीतीश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कई बार अपनी नाराजगी का इजहार किया है। अब चिराग ने मुंगेर जिलाध्यक्ष राघवेंद्र भारती को मीडिया में वो बयान देने के बाद हटा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में एनडीए अटूट है। इस बयान की खबर जैसे ही पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची वैसे ही जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई हो गई। दरअसल यह चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें हथियाने का हथकंडा भी है क्योंकि टिकटार्थियों से टिकट का सौदा होने के आरोप भी लगते रहे हैं।

दरअसल केंद्र में दूसरी बार पूर्ण बहुमत में एनडीए की सरकार के आने के बाद भाजपा के स्वर बदलने लगे हैं तो जदयू भी अपनी वोट की राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव करीब है और एनडीए में दरार नजर आ रही है ! बिहार की सत्ता में बैठे एनडीए गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के बीच आपसी जुबानी जंग का दौर जारी है। इस जंग में भाजपा इस बार कुछ ज्यादा तल्ख नजर आ रही है और इस बार तो बिहार नेतृत्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। इससे पहले भी तीन तलाक से लेकर धारा 370 पर कई बार भाजपा और जदयू आमने-सामने आ चुके हैं। बिहार विधान सभा चुनाव 2020 होने में अब कुछ ही महीने बचे हुए हैं, उससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के जुबानी प्रहार कुछ और मतलब निकल रहा है।

भाजपा विधान पार्षद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने बयान दिया था कि अब किसी कीमत पर बिहार की राजनीति में भाजपा छोटे भाई की हैसियत में नहीं रहना चाहती। यह भी कह दिया कि बिहार की सत्ता सुशील कुमार मोदी को सौंप देनी चाहिए। बिहार में पहली बार किसी राजनेता ने सुशील मोदी को सत्ता सौंपने का हवाला देकर नयी चाल चली है। पासवान ने यहां तक कह दिया है कि सुशील मोदी बिहार में ही रहें और नीतीश कुमार को दिल्ली चले जाना चाहिए। इनके इस बयान से तो इतना ही कहा जा सकता है कि किसी ने किसी तरीके से इस बार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भाजपा की नजर टिकी हुई है।

असम के बाद बिहार के सीमांचल में रह रहे घुसपैठियों को लेकर आरएसएस नेताओं सहित बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने नीतीश पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने बिहार में एनआरसी लागू करने को लेकर कहा था कि सूबे के सीमांचल इलाके में घुसपैठियों की भारी तादाद मौजूद है। यहां भी एनआरसी लागू होना जरूरी है। इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने पलटवार करते हुए कहा था कि एनआरसी की जरूरत बिहार जैसे राज्य में बिल्कुल नहीं है। जबकि भाजपा किसी भी कीमत पर एनआरसी के मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है। वहीं दूसरी तरफ अल्पसंख्यक वोटरों को रिझाने की फिराक में जदयू एनआरसी का विरोध कर रही है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एनआरसी के मुद्दे पर कहा कि सीमांचल इलाके में जनसंख्या विस्फोट का कारण बांग्लादेशी घुसपैठिये हैं इसलिए बिहार जैसे प्रदेश में एनआरसी को लागू करना बहुत जरूरी है। वहीं भाजपा नेता राम नारायण मंडल भी सीमांचल में बांगलादेशी घुसपैठियों को जनसंख्या विस्फोट का बड़ा कारण मानते हैं।

इस बीच भाजपा के राज्य प्रभारी भूपेन्द्र यादव ने पटना में 5 से 9 जुलाई के बीच केन्द्रीय बैठकों का आयोजन किया था जिसमें कई जिलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अलग अलग बुलाये गये थे और इसमें से बताते हैं की कम से कम 75 लोग कोरोना पॉजिटिव निकल गये। विपक्ष तंज कर रहा है कि तबलीगी जमात के मौलाना शाद पर तो अभी भी कोरोना फ़ैलाने के आरोप लग रहे हैं पर क्या कोरोना काल में इस बैठक के लिए भी कोई कार्रवाई होगी ?

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह का लेख।)

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This post was last modified on July 19, 2020 11:53 am

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