जौनपुर में आचार संहिता का मजाक उड़ाता ‘महामानव’ का होर्डिंग

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जौनपुर। क्या भारत देश में दो तरह का कानून काम कर रहा है? सवाल थोड़ा अटपटा जरूर है तो चुभता हुआ भी है। जो हर किसी के ज़ेहन में उमड़-घुमड़ रहा है, लेकिन शासन सत्ता की बेजा कार्रवाई के खौफ ने ज़ुबान को मानो खुलने से रोक रखा है। फिर भी बहस, क्रिया-प्रतिक्रिया का दौर सोशल मीडिया पर इसको लेकर जारी है। बहस के केन्द्र बिन्दु में मर्यादा पुरुषोत्तम के साथ ‘महामानव’ (पीएम नरेन्द्र मोदी) की फोटो/नाम है। जिस पर शायद चुनाव आयोग की नजरे इनायत नहीं हुई हैं या किसी ने साहस नहीं किया है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह आचार संहिता के दायरे से बाहर भी हो सकता है।

देश में लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। चुनाव आयोग की बंदिशों का दायरा भी बढ़ रहा है। चट्टी चौराहों से लेकर गली-मोहल्ले से नेताओं, विभिन्न दलों, सरकार से जुड़ी योजनाओं के होर्डिंग्स-बैनर इत्यादि को नोंच कर उतार दिया गया है। बावजूद इसके जनमानस में एक बात को लेकर छिड़ी बहस खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। वह यह है कि क्या देश में दो तरह का कानून काम कर रहा है। एक विपक्ष और हुकूमत (सरकार) के खिलाफ आवाज उठाने वालों की आवाज को दबाने, दूसरे सत्ता की खुशामद करने और जय-जयकार करने वालों को कायदे कानून से उपर उठकर सबकुछ करने की मिली हुई खुली छूट?

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) ने बीते महीने की शनिवार 16 मार्च, 2024 को दोपहर 3 बजे लोकसभा चुनाव की घोषणा किया था। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, उत्तर प्रदेश में आम चुनाव सभी सात चरणों में होंगे। उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता पूरे देश में लागू कर दी गई थी। मतदान प्रक्रिया पूरी होने और रिजल्ट प्रकाशन के बाद ही आदर्श आचार संहिता हटाई जाएगी। लोकसभा चुनाव के दौरान शांतिपूर्ण और स्वच्छ माहौल में वोटिंग को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और चुनाव आयोग की ओर से चुनाव को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। सभी चरणों के चुनाव संपन्न होने के बाद 4 जून को रिजल्ट का प्रकाशन किया जाएगा। देश में 1.5 करोड़ पोलिंग अफसर तैनात होंगे। 10 लाख पोलिंग बूथ पर चुनाव होगा। तो वहीं देश में 97 करोड़ मतदाताओं की इसमें सहभागिता होगी।

चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही सर्वप्रथम सभी सरकारी होर्डिंग बैनर जिनमें सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया गया था उतार दिया गया था। प्रमुख मार्गों, विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य से संबंधित प्रवेशद्वार पर लगे होर्डिंग बैनर पर भी जनप्रतिनिधियों के नाम और फोटो को छुपा दिया गया जो शासन सत्ता से संबंधित थे, लेकिन उत्तर प्रदेश के जौनपुर लोकसभा क्षेत्र में एक होर्डिंग आज भी चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ चुनाव आयोग के अधिकारियों की बाट जोह रहा है, ताकि इसकी ओर चुनाव आयोग की नजरें इनायत हो सकें। लेकिन अधिसूचना जारी होने के एक माह बाद भी इसकी ओर या तो नजरें नहीं गई हैं या नज़र डालने की जुर्रत ही नहीं की गई है।

पुलिस चौकी के समीप ही लगी है होर्डिंग

दरअसल, यह होर्डिंग अयोध्या के राम मंदिर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम फोटो से जुड़ा हुआ है। जिस पर विपक्षी दल के नेताओं ने निशाना साधते हुए स्थानीय जिला प्रशासन को कटघरे में खड़े करते हुए चुनावों आयोग की मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं। जनहित के मुद्दों पर प्रखर होकर तल्ख टिप्पणी करने वाले जौनपुर के पत्रकार खुर्शीद अनवर खान के facebook वाल पर नजर डालें तो वह लिखते हैं “किसी ने ऐसी ढेर सारी तस्वीरें भेजी हैं। भेजने वाले का दावा है कि ऐसी होर्डिंग जौनपुर शहर के तक़रीबन हर मंदिर पर लगे हैं। जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम के साथ ‘महामानव’ (पीएम नरेन्द्र मोदी) भी हैं। इन तस्वीरों को भेजने वाले ने एक सवाल भी भेजा है। सवाल यह है कि क्या यह होर्डिंग आचार संहिता के दायरे में आती है?” 

मंदिर के ऊपर पुलिस चौकी के बगल में लगी होर्डिंग

पत्रकार खुर्शीद अनवर खान पलटवार करते हुए सवाल दाग देते हैं, “मुझे क़ानून की ज़्यादा जानकारी नहीं है। जानकारों की नज़र में अगर यह आचार संहिता का उल्लंघन है तो कोई व्यक्ति ज़िम्मेदार अफ़सरों के मुंह पर पानी के छींटे मार कर उन्हें गहरी नींद से जगा दे।”

इस इस होर्डिंग को देखकर, जानकर लोगों को हैरत भी हो रही है कि आखिरकार इस होर्डिंग को क्यों नहीं उतर गया है? क्या यह होर्डिंग आचार संहिता की बंदिशों के दायरे में नहीं आता? ऐसे अनगिनत सवाल लोग उछाल रहे हैं।

मजे की बात है कि “राम काजू किन्हें बिनु मोहि विश्राम कहां” लिखा हुआ यह होर्डिंग जिसमें रामलला की आरती करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो दिखलाई दे रही है। ऐसे होर्डिंग जौनपुर शहर के कई प्रमुख स्थलों पर नज़र आ रही है जिसे सरकार और भाजपा के प्रचार तंत्र से जोड़ कर देखा जा रहा है। जिसे लेकर लोग अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उंगली उठाते हुए नजर आए हैं। लेकिन अधिसूचना जारी होने के बाद होर्डिंग-बैनर उतारने में जुटे हुए लोगों की ना तो नजर इस पर पड़ी है और ना ही चुनाव आयोग की बंदिशों का इस पर असर होता दिख रहा है। शाय़द होर्डिंग और फोटो देश के ‘महामानव’ (पीएम मोदी) से जुड़ा हुआ है तो उसे उतारने की भला कौन व कैसे हिमाकत करें?

जौनपुर शहर के सिपाह पुलिस चौकी के समीप लगे रोड लगा यह होर्डिंग सरकार के प्रचार का ही एक हिस्सा है। राम मंदिर निर्माण भाजपा के एजेंडा में शामिल रहा है। मंदिर निर्माण और रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात लगाये गये यह होर्डिंग लोगों (मतदाताओं) को लुभाने से जोड़ कर देखा जा रहा है। अभय सिंह रामलला की फोटो के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फोटो वाली होर्डिंग को सरकार खासकर भाजपा के प्रचार से जोड़ कर देखते हैं। वह कहते हैं “चुनाव आयोग को तो फौरन इन्हें उतरवाना चाहिए।” वह इससे भी घोर आश्चर्य इस बात पर जताते हैं कि अभी तक किसी की नज़र इस क्यों नहीं पड़ी है?”

राम मंदिर को भुनाने के लिए लगाए गए थे होर्डिंग

मंदिर के परिसर में लगी होर्डिंग

राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साथ ही देशभर में धर्म स्थलों (मंदिरों) के समीप और मंदिर के निकट इस प्रकार के भारी संख्या में होर्डिंग जगह-जगह लगाए गए थे। तब लोगों की प्रतिक्रिया रही की राम मंदिर को एक बार पुनः भुनाने के लिए भाजपा सरकार रामलला के प्राण प्रतिष्ठा को आगे कर ऐसे होर्डिंग बैनर लगाकर लोकसभा चुनाव में चुनावी नैया पार लगाना चाहती है।

सुर्खियों में है जौनपुर लोकसभा

देश और प्रदेश की राजनीति में अहम हिस्सेदारी निभाने वाले उत्तर प्रदेश के जौनपुर का अपना एक वजूद है। सल्तनत किसी की भी रही हो जौनपुर का जलवा दूर तलक रहा है। शिक्षा-चिकित्सा, राजनीति से लेकर देश की सरहदों पर अपने प्राणों को न्योछावर कर देने, देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले रणबांकुरों की शौर्य गाथा से यहां का इतिहास भरा हुआ है तो अपराध की दुनिया से नाता रखने वालों की कलंक कथा में भी जौनपुर का नाम जुड़ने से बच नहीं पाया है।

मौजूदा लोकसभा चुनाव भी एक इतिहास रचने सरीखा ही बताया जा रहा है। गौर करें तो बीते तीन दशक से उत्तर प्रदेश की सियासत में बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को पहली बार किसी केस में सजा सुनाई गई है। जौनपुर में नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर का अपहरण और रंगदारी वसूली के मामले में अचानक से जौनपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने धनंजय सिंह और उसके साथी संतोष विक्रम सिंह को 7 साल की सजा और 50,000 का जुर्माना लगाते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। जहां से तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बाहर आने की राह नहीं सुझ रही है। कहा तो यहां तक जाता है कि उनके चुनाव लड़ने के मंसूबों पर पानी फेरते हुए उनके हर हथकंडे को भी फेल करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखा गया है।

भाजपा ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री रहे कांग्रेस के ‘हाथ’ का साथ छोड़ ‘कमल खिलाने’ आए कृपाशंकर सिंह को मैदान में उतारा है। कृपाशंकर सिंह जौनपुर के ही रहने वाले हैं, लेकिन उनका लगाव और अत्यधिक समय महाराष्ट्र में ही बीता है जौनपुर में उनका अपना कोई भी योगदान नहीं है। जिसके बलबूते वह अपनी चुनावी नैया पार कर सकें। शासन सत्ता के दमखम पर वह मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने सारे समीकरणों को ध्वस्त करते हुए कभी बसपा के खेवनहार रहे, उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित एनएचआरएम घोटाले के आरोपी बाबूसिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा दिया है तो वहीं पूर्व सांसद बाहुबली धनंंजय सिंह की पत्नी ने पति के जनसरोकार से जुड़े कार्यों और अपनी योग्यता के बल पर बसपा के टिकट पर मैदान में उतर सभी की बौखलाहट को बढ़ा दिया है।

पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी धनंंजय श्रीकला रेड्डी कहती हैं “धनंंजय सिंह को सजा होना, जेल जाना महज इत्तेफाक नहीं साजिश का हिस्सा है जिसे जौनपुर की जनता जानती है समझती भी है। वह कहती हैं हमें देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है सही और गलत कौन है इस बात का भी फैसला मतदाता बंधु करेंगे। 

दल और जाति के आधार पर होती कार्रवाई

जौनपुर के पत्रकार युवा सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अनवर खान “जनचौक” से मुखातिब होते हुए वह एक वाकया सुनाते हुए बताते हैं कि जौनपुर-शाहगंज मार्ग पर खेतासराय कस्बे में पिछले कई वर्षों से एक बड़ी सी होडिंग लगी हुई थी, जिस पर ना किसी दल का नाम था, ना ही कोई दल का चुनाव चिन्ह यदि उस पर कुछ अंकित था तो सिर्फ-सिर्फ पूर्व विधायक नदीम जावेद की फोटो के साथ “आवास नदीम जावेद” लिखा हुआ था। चुनाव आयोग द्वारा जैसे ही चुनाव की तिथि घोषित की जाती है वैसे ही कुछ घंटो के अंदर होर्डिंग को नोच दिया जाता है प्रशासन द्वारा अब आप क्या इसे क्या कह सकते हैं?

जबकि गौर किया जाए तो जिले में आज भी कई ऐसे शासन सत्ता से जुड़े हुए लोग हैं जिनके घरों, प्रतिष्ठानों पर बाकायदा उनके आवास कार्यालय होने से लेकर उनका नाम पद भी अंकित है, जिसपर जिम्मेदार लोगों की नजरें कब पड़ेंगी ?

खुर्शीद अनवर, अवधेश निषाद सहित अन्य लोग दल और जाति के आधार पर मौजूदा सरकार में हो रही कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं “पारदर्शिता की बात करने वाली भाजपा की सरकार पारदर्शिता को दरकिनार कर मनमाना करती आ रही है।

(जौनपुर से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट।)

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