Wednesday, October 27, 2021

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नोबेल लॉरिएट कैलाश सत्यार्थी बने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य का एडवोकेट

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नई दिल्ली। नोबेल शांति पुरस्‍कार विजेता कैलाश सत्‍यार्थी को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपना सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एडवोकेट बनाया है। “एसडीजी एडवोकेट” के रूप में सत्यार्थी संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्य को सन 2030 तक हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सत्‍यार्थी की बाल दासता को समाप्‍त करने और बच्‍चों के गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा के अधिकारों के लिए वैश्विक आंदोलन के निर्माण में अग्रणी भूमिका रही है। आपको बता दें कि सत्यार्थी के प्रायस से ही बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून यानी आईएलओ कन्वेंशन-182 पारित हुआ। ऐसा माना जा रहा है कि उनके इन्हीं योगदानों को देखते हुए उन्हें एसडीजी एडवोकेट बनाया गया है।

सत्‍यार्थी की “एसडीजी एडवोकेट” के रूप में नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब एक तरफ बाल श्रम उन्‍मूलन का अंतरराष्‍ट्रीय वर्ष चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूरी दुनिया को दो दशकों में पहली बार बाल श्रम में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। बाल श्रमिकों की संख्‍या अब बढ़कर 16 करोड़ हो गई है। पहले यह संख्या तकरीबन 15.2 करोड़ थी। वहीं कोविड-19 के दुष्‍परिणामों ने लाखों बच्‍चों को खतरे में डाल दिया है। जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने सतत विकास लक्ष्य के एजेंडे में सन 2025 तक समूचे विश्वभर से बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में 2025 तक दुनिया से बाल श्रम को खत्‍म करने के संकल्‍प पर एक बड़ा सवाल उठ खड़ा होता है और संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्‍य हासिल करने की जो प्रतिबद्धता जताई है, वह भी चुनौतीपूर्ण लग रही है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सत्‍यार्थी को एसडीजी एडवोकेट नियुक्त करते हुए कहा, “मैं दुनियाभर के बच्चों को आवाज देने के लिए श्री सत्यार्थी की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं। यह समय की जरूरत है कि हम एक साथ आएं, सहयोग करें, साझेदारी बनाएं और एसडीजी की दिशा में वैश्विक कार्रवाई को तेज करने में एक दूसरे का समर्थन करें।”

इस अवसर पर सत्यार्थी ने कहा, ‘‘दुनिया के बच्चों की ओर से मैं इस नियुक्ति को स्वीकार करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं। महामारी से पहले के चार वर्षों में 5 से 11 साल की उम्र के 10,000 अतिरिक्त बच्चे हर दिन बाल मजदूर बन गए। यह वृद्धि भी संयुक्त राष्ट्र एसडीजी के पहले चार वर्षों के दौरान हुई। यह एक अन्‍यायपूर्ण विकास है जो 2030 एजेंडा की संभावित विफलता की प्रारंभिक चेतावनी देता है। जो बच्चे बाल श्रम में हैं वे स्कूल में नहीं हैं। उनकी स्वास्थ्य की देखभाल, शुद्ध जल और स्वच्छता तक सीमित या कोई पहुंच नहीं है। वे घोर गरीबी के दुश्‍चक्र में रहते हैं और पीढ़ीगत नस्लीय और सामाजिक भेदभाव का सामना करते हैं।’’   

सत्यार्थी आगे कहते हैं, ‘‘हमारे पास ज्ञान है। हमारे पास संसाधन हैं। लेकिन, हमें उस राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है जो बच्चों के शोषण को समाप्त करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन, नीतियां और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। वैश्विक विकास तभी समावेशी और टिकाऊ हो सकता है जब वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियां भी स्वतंत्र, सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित हों।’’

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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