Sunday, October 17, 2021

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सिद्धू दिल्ली तलब, इस्तीफे पर होगा फैसला

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बढ़ते विवाद के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके नवजोत सिंह सिद्धू को दिल्ली तलब किया है। उन्होंने ट्वीट के जरिए 28 सितंबर को इस्तीफा दे दिया था। तब से उनका इस्तीफा न तो मंजूर किया गया और न नामंजूर। पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत ने ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी है कि सिद्धू को दिल्ली तलब किया गया है। पहले वह पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और हरीश रावत से मिलेंगे। फिर आगे की कार्यवाही को अंजाम दिया जाएगा।

कांग्रेस आलाकमान द्वारा सिद्धू को दिल्ली तलब किए जाने के बाद पंजाब में सियासी हलचल एकाएक तेज हो गई है। जिक्रेखास है कि 16 अक्टूबर को कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी संकट पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए भी आलाकमान आर-पार का फैसला कर लेना चाहता है। पंजाब से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के कई नेता दबी जुबान में कह रहे हैं कि सिद्धू जो कर रहे हैं वह दरअसल ‘पॉलिटिकल ब्लैकमेलिंग’ है।

लखीमपुर खीरी हिंसा के शिकार मृतक किसानों और पत्रकार के घर जाकर, मौन व्रत व भूख हड़ताल करके उन्होंने फौरी तौर पर अपना राजनीतिक पुनर्वास जरूर किया लेकिन अपनी ही सरकार के प्रति अपने तेवर नहीं बदले। सूत्रों के मुताबिक गांधी परिवार ने इसका बेहद बुरा माना है, जिसमें वायरल हुईं वीडियो-ऑडियो में नवजोत सिंह सिद्धू साफ तौर से यह कहते हुए पाए गए कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया होता तब दिखाते की सक्सेस क्या होती है।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के प्रति घोर आपत्तिजनक अपशब्द कहते हुए सिद्धू ने कहा कि यह शख्स (यानी चन्नी) विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लुटिया डुबो देगा। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक उनका यह ऑडियो-वीडियो बाकायदा कांग्रेस आलाकमान को मुहैया कराया गया है। सूबे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सिद्धू इस पर क्या सफाई देंगे और आलाकमान उनकी सफाई को कितनी तरजीह देगा? यह इसलिए भी अहम है कि चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक मिसाल कायम की थी और हाल-फिलहाल तक की चन्नी की पहलकदमियां बताती हैं कि उनकी लोकप्रियता में लगातार इजाफा हो रहा है और इसीलिए वह पार्टी हाईकमान के लिए बड़ा चेहरा बन गए हैं। उन्हें स्टार प्रचारकों की अग्रिम श्रेणी में रखा गया है। इस्तीफा दे चुके ‘प्रधान’ को यह भी रास नहीं आ रहा।

दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू का पैंतरा खुद उनके खिलाफ जाता दिख रहा है। ‘सुपर सीएम’ की महत्वाकांक्षा रखने वाले सिद्धू ऊपरी तौर पर दो मामलों को लेकर गहरे खफा थे। एक, डीजीपी और एडवोकेट जनरल की नियुक्ति। दो, मंत्रिमंडल के चयन में उनकी सलाह न लिए जाना या नहीं मानना। साफ हो गया है कि चन्नी किसी भी सूरत में अपने फैसले नहीं पलटेंगे। ‘गुरु’ भी अडिग हैं कि जब तक उनकी शर्तें मानी नहीं जाएगी, तब तक वह इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। बेशक कांग्रेस में रहकर पार्टी की सेवा करते रहेंगे। कैसी सेवा? अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के लिए कदम-दर-कदम दिक्कतें खड़ी करके!

आज कैबिनेट में परगट सिंह को छोड़कर कोई भी मंत्री प्रत्यक्ष रूप से उनके साथ नहीं है। रजिया सुल्तान ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था और फिर खुद ही वापस भी ले लिया। एक-दो विधायकों को छोड़कर कोई भी उनके पक्ष में नहीं बोल रहा। जबकि सिद्धू मानकर चल रहे थे कि काफी मंत्री व विधायक उनके समर्थन में हैं। सो दबाव की रणनीति भी आकार नहीं ले पाई।

कहा जा रहा है कि 28 सितंबर के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने जो रवैया अख्तियार किया हुआ है, उस पर आलाकमान की पैनी निगाह है और भीतर ही भीतर टेढ़ी भी! कुछ सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी चाहते हैं कि जिस तरह ट्वीट करके सिद्धू ने इस्तीफा दिया, उसी तरह ट्वीट करके खुद ही वापिस ले लें। कांग्रेस आलाकमान को सीधा तथा खुला हस्तक्षेप न करना पड़े। देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऐसा होगा? निश्चित तौर पर इसके लिए महज आजकल का इंतजार करना पड़ेगा।

प्रसंगवश, कांग्रेस से लगभग अलग हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सवाल को आज भी कई सियासी माहिर प्रासंगिक मानते हैं कि कांग्रेस की कौन सी मजबूरी है जो वह सिद्धू को ढो रही है।
(पंजाब से वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)

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