Thu. Apr 2nd, 2020

यूपी सरकार किसी भी कीमत पर प्रदर्शन रोकने पर आमादा, अब तक 11 प्रदर्शनकारियों की मौत, नेट और स्कूल-कॉलेज बंद

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यूपी के तमाम जिलों में बीस दिसंबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस झड़प में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। देश भर में अभी भी सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन जारी है। इन विरोध-प्रदर्शनों को बल पूर्वक रोकने के लिए केंद्र सरकार के इशारे पर पुलिस दमन के साथ ही गिरफ्तारियां भी हो रही हैं, लेकिन पूरे देश में प्रदर्शन जारी है।

सीएए और एनआरसी को लेकर पूरे देश में ही प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले दो दिनों में यूपी में यह प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। लोग प्रदर्शन न कर सकें, इसके लिए यूपी के तमाम जिलों में दफा 144 लागू की गई है। इसके बावजूद लोग सड़कों पर निकल कर प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जिलों में प्रदर्शनकारियों को जबरन रोकने की कोशिश में भीड़ हिंसक हो गई।

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19 दिसंबर को राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। यहां दो पुलिस चौकी को भीड़ ने जला दिया था। कई वाहनो को भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी थी। अगले दिन प्रदर्शन की यह आग पूरे प्रदेश में फैल गई। 20 दिसंबर को प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई है। बिजनौर कानपुर, संभल, फिरोजाबाद में प्रदर्शन के दौरान पांच मौत हो गई। देर शाम शासन ने माना था कि छह मौतें हुई हैं। यूपी में पुलिस के साथ झड़पों में 11 लोगों को मौत हो गई है। पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने नौ मौतों की पुष्टि की है।

बनारस के बजरडीहा में भी एक बच्चे की मौत हो गई। यहां के फारूकी नगर में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में जुलूस निकाल रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। यहां धारा 144 लागू होने के बावजूद लोग जुलूस निकाल रहे थे। लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़ में घायल मोहम्मद सगीर (8) की रात में मौत हो गई। 13 लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। कुछ अपुष्ट सूत्रों ने यहां मरने वालों की संख्या चार बताई है। कहा जा रहा है कि रात में ही पुलिस ने चुपचाप इनका अंतिम संस्कार करा दिया।

यूपी के तमाम जिलों में अभी भी धारा 144 लागू है। इसके बावजूद लोग घरों से निकलकर विरोध कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक अब तक 218 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यूपी में अब तक 21 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद की जा चुकी है। इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के मामले में दुनिया में भारत पहला देश बन गया है। यहां स्कूल कॉलेज भी बंद कर दिए गए हैं।

स्वराज इण्डिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी को राजनीतिक बदले की भावना से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने दारापुरी को तत्काल रिहा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दरअसल एसआर दारापुरी योगी सरकार की हर जन विरोधी, लोकतंत्र विरोधी कार्रवाइयों के आलोचक रहे हैं। इसीलिए वह उत्तर प्रदेश सरकार की आंख की किरकिरी बने हुए हैं। यह दुखद है कि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिसमें कैंसर होने की भी पूरी सम्भावना है, दारापुरी को 19 दिसंबर की घटना में बेवजह लिप्त बताकर गिरफ्तार किया गया। जबकि दारापुरी 19 दिसंबर के मार्च में शरीक भी नहीं थे।

दिल्ली में शुक्रवार को दरियागंज हिंसा के सिलसिले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यहां एक पुलिस वाहन में आग लगा दी गई थी। दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान 13 पुलिस अधिकारियों समेत कम से कम 45 लोग घायल हो गए हैं। यहां भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। जामा मस्जिद के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान चंद्रशेखर संविधान की प्रति लेकर पहुंचे थे।

जामिया यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन किया जा रहा है। आज से एक हफ्ते पहले यहां पुलिस ने कैंपस में घुसकर छात्र-छात्राओं को बुरी तरह से पीटा था। यहां तक कि लाइब्रेरी में बैठे पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को भी पीटा था। आंसू गैस के गोले भी फेंके गए थे। इसकी देश भर में तीखी आलोचना हुई थी।

बिहार में भी लगातार नागरिकता कानून और एनआरसी का विरोध जारी है। आज यहां आरजेडी ने भारत बंद का आह्वान किया है। यहां आरजेडी कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह सड़क जाम कर दी है और ट्रेनों को भी रोका गया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा है, “मैं हिंदू हूं। मैं भारतीय हूं। मैं सीएए और एनआरसी के खिलाफ हूं।” इस बीच एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा है कि सीएए देश की धार्मिक, सामाजिक एकता और सद्भावना को चोट पहुंचाएगा। उन्होंने कहा है कि सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि देश की एकता और प्रगति के बारे में सोचने वाले लोग भी सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं।

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