ऐपवा ने सीएम नीतीश को लिखा पत्र, कहा- आपकी भाषा बहुत ही आपत्तिजनक, वक्तव्य से असहज स्थिति पैदा हुई

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पटना। ऐपवा ने आज संवाददाता सम्मेलन आयोजित करके कहा कि उसने बिहार के मुख्यमंत्री को कल बिहार विधानमंडल में दिए गए फूहड़ वक्तव्य को लेकर पत्र लिखा है, जिसके कारण बेहद असहज स्थिति पैदा हुई है। प्रो. भारती एस कुमार, मीना तिवारी, शशि यादव, सोहिला गुप्ता और प्रीति कुमारी ने आज संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा कि कल बिहार विधान मंडल में पेश किए गए ऐतिहासिक सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के वक्तव्य की भाषा शैली बहुत ही आपत्तिजनक थी, हालांकि बाद में इस पर उन्होंने माफी मांग ली है, लेकिन यह बहुत ही गंभीर विषय है।

ऐपवा ने कहा है कि सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण ने पूरे देश में राजनीति को एक नई दिशा दी है, उम्मीद की जा रही है कि सर्वेक्षण के आंकड़ों के आलोक में विकास की तनुदरूप नीतियां बनाने की प्रक्रिया बिहार में अब शुरू होगी, लेकिन ठीक इसी मोड़ पर मुख्यमंत्री के वक्तव्य ने पूरे मामले की गंभीरता को कमजोर किया है।

उनके वक्तव्य पर सदन के अंदर जहां महिला विधायकों के लिए असहज स्थिति बनी वहीं कुछ पुरुष विधायकों ने ठहाके लगाए। यह दिखलाता है कि हमारी संवैधानिक संस्थाएं अब भी किस कदर महिला विरोधी मानसिकता की चपेट में हैं। साथ ही यह महिला विधायकों के लिए कार्य स्थल पर उत्पीड़न है।

ऐपवा ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा पूरे बिहार की चाहत है लेकिन लड़कियों की शिक्षा को जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य तक सीमित कर देना गलत है। महिलाओं की शिक्षा का जैसे-जैसे प्रसार-प्रचार होगा जाहिर सी बात है प्रजनन दर में कमी आएगी।

लेकिन प्रजनन दर कम करने के लिए दूसरे सुरक्षात्मक उपायों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है। महिलाओं की चयन की स्वतंत्रता, सुरक्षित और महिलाओं के लिए सुविधाजनक गर्भनिरोधक साधनों की सहज उपलब्धता, सुरक्षित प्रसव, मातृ व नवजात की सुरक्षा आदि भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

ऐपवा ने कहा कि परिवार नियोजन सिर्फ महिलाओं की जवाबदेही नहीं है, यह उनके पति या पार्टनर की भी जिम्मेदारी है। महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं की शिक्षा के साथ समाज में उनके लिए सम्मानजनक माहौल, रोजगार और सम्पूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत है जिसपर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

महिलाओं पर हिंसा की घटनाओं में अक्सर हम सरकारी मशीनरी को संवेदनहीन और उत्पीड़कों के पक्ष में देखते हैं। सरकारी मशीनरी को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत है।

(विज्ञप्ति पर आधारित।)

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