‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-2: दो संघर्ष, दो जीवन, दो लालसाएं, दो महत्वाकांक्षाएं, दो ज़िदें, दो अरमान

और इस संस्मरण में मानो अलग-अलग विधाएं ऐसे ही बैठ गई हैं आकर जैसे तार पर कुछ चिड़िया। एक आत्मकथा और एक जीवनी और एक उपन्यास और एक संस्मरण- एक दूसरे में गुंथे, लिपटे और उलझे हुए और हम ठीक-ठीक ये नहीं जान सकते कि वे विधाएं एक-दूसरे से अलग होने को छटपटा रही हैं … Continue reading ‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-2: दो संघर्ष, दो जीवन, दो लालसाएं, दो महत्वाकांक्षाएं, दो ज़िदें, दो अरमान