वाराणसी राजघाट से दिल्ली राजघाट के लिए निकली “एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा मथुरा प्रशासन की तरफ़ से ये निर्देश दिया गया है कि धीरेन्द्र शास्त्री के नेतृत्व में चल रही “सनातन एकता पदयात्रा” का समापन कार्यक्रम 16 नवंबर को मथुरा में होने के कारण “एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा को ज़िले में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी सकती।
यात्रा जो 44 वें दिन आगरा में पहुंची, के संयोजकों ने आरोप लगाया कि यह रवैया न केवल प्रशासनिक दुराग्रह को दर्शाता है, बल्कि नागरिकों के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी गहरा प्रहार है।
यात्रा के संयोजकों ने जिलाधिकारी, मथुरा से स्पष्ट कहा कि यह पदयात्रा बनारस से लेकर अब तक लगभग 800 किलोमीटर की दूरी पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से तय कर चुकी है। ज़िले की सीमा में घुसने से पदयात्रा को रोकना अलोकतांत्रिक और अनुचित है। इसके बावजूद जिलाधिकारी द्वारा 15 और 16 नवंबर को ज़िले के बॉर्डर सील होने के बहाना बताकर यात्रा का प्रवेश रोके की धमकी दी गई।
पदयात्रा के संयोजक राम धीरज ने कहा “यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि एक ओर सरकार, उसके मंत्री और मथुरा प्रशासन एक विभाजनकारी यात्रा को हर संभव सहयोग दे रहा है, वहीं दूसरी ओर गांधी, लोकतंत्र, समानता, न्याय और बंधुत्व का संदेश लेकर चल रही हमारी शांति पदयात्रा को रोकने में जुटा है। यह केवल प्रशासनिक असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
सभी पदयात्रियों ने मिलकर यह फ़ैसला लिया है कि पदयात्रा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार “रघुपति राघव राजा राम..ईश्वर अल्लाह तेरो नाम” के उद्घोष के साथ 15 नवंबर को आगरा से मथुरा की तरफ़ प्रस्थान करेगी और 16 नवंबर को सुबह मथुरा में प्रवेश करेगी”। इसके साथ ही देशभर के गांधीजनों और सामाजिक संगठनों से अपील की गई कि सरकार के इस अलोकतान्त्रिक रवैया का अपने स्थानीय ज़िलों में विरोध करें।
पदयात्रा को समर्थन दे रहे देशभर के हजारों गांधीजन एवं लोकतांत्रिक संगठनों ने मथुरा प्रशासन के इस रुख की निंदा की है और केंद्र एवं राज्य सरकार से अपील की है कि वे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करें, तथा इस शांतिपूर्ण पदयात्रा को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने दें।