संस्कृति-समाज

किताब समीक्षा: कविता की जनपक्षधरता पर शैलेंद्र चौहान की नज़र

शैलेंद्र चौहान बुनियादी तौर पर कवि हैं उन्होंने कुछ कहानियां और एक उपन्यास भी लिखा है। लघु पत्रिका ‘धरती’ का एक लंबे…

7 hours ago

मौजूदा राजनीतिक हालत पर टिप्पणी करता है खालिद जावेद का उपन्यास ‘एक ख़ंजर पानी में’

प्रो. खालिद जावेद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के ब्रांड एंबेसडर हैं। अपने बेमिसाल अफसानों से न सिर्फ उर्दू बल्कि दूसरी…

1 day ago

पुस्तक समीक्षा: दर्जाबंदी तोड़ने की निगाह

सदियां गुजर गईं मगर वंचनाओं ने आज तक आधी दुनिया का पीछा नहीं छोड़ा। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं, कोई ऐसी…

1 month ago

शीला संधु को लेकर पंकज बिष्ट का संस्मरण: उन्होंने चुनौती स्वीकारी

अगर उनके निजी जीवन को देखें तो कहना गलत नहीं होगा कि शीला संधु सही अर्थों में चुनौती का दूसरा…

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सीपी-कमेंट्री: आत्महत्या के विरुद्ध

एक कविता से दिवंगत गोरख पांडेय की याद आती है। याद उस कविता का फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन द्वारा किए…

1 month ago

जन्मदिन पर विशेष: मौत के बाद भी जिंदा रहने का नाम है चे

एक नाम है चे ग्वेरा। चे का आज जन्मदिन है। चे मिसाल हैं कि जीकर ही नहीं मरकर भी जिंदा…

2 months ago

जन्मदिन पर विशेष: कोरोना में बेहद प्रासंगिक हो गया है चे ग्वेरा का सामाजिक चिकित्सा विज्ञान का सिद्धांत

संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बड़े देश की तुलना में क्यूबा जैसे छोटे देश द्वारा कोरोना को बेहतर ढंग से प्रबंधित…

2 months ago

बिरसा मुंडा: 25 साल का जीवन, 5 साल का संघर्ष और भगवान का दर्जा!

भारत के इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे आदिवासी नायक हैं जिन्होंने झारखंड में अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्नीसवीं शताब्दी…

2 months ago

शहीद दिवस: बिरसा के उलगुलान ने मोड़ दी थी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की धारा

जून का महीना झारखंड के लिए विशेष महत्व इसलिए रखता है कि इसी महीने की 9 तारीख को पूरा झारखंड…

2 months ago

कविता का जनतंत्र और जनतंत्र की कविता

इक्कीसवीं सदी की आरम्भिक हिन्दी कविता को बीसवीं सदी के अन्त की हिन्दी कविता का ही विस्तार माना जा सकता…

2 months ago
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