Sun. Nov 29th, 2020

संस्कृति-समाज

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तुम कैसे बेशर्म हुए, वश में होकर इन ब्राह्मणों के नित छूने को चरण अरे तुम झुक जाते हो यों...

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जीवित है तू आज मरा सा, पर मेरी यह अभिलाषाचिता निकट भी पहुंच सकूं अपने पैरों-पैरों चलकरयह पक्तियां दर्शाती हैं...

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इलाहाबाद के प्रगतिशील राजनीति और साहित्य से जुड़ा हर व्यक्ति जिया भाई को जानता ही जानता है, वे इन दोनों...

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फ़हमीदा रियाज़ को 1999 के आसपास मुज़फ़्फ़रनगर में हुए एक मुशायरे में सुनने का मौका मिला था। इस इंडो-पाक मुशायरे...

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वामिक जौनपुरी का शुमार उन शायरों में होता है, जिनकी वाबस्तगी तरक्कीपसंद तहरीक से रही। उन्होंने अपने कलाम से सरमायेदारी...

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1955 में फ़ैज़ ने, जो 1951 से ही मोंटगोमरी जेल में राजद्रोह की गतिविधियों के आरोप में क़ैद थे, नज़्म आ...

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बच्चों के लिए लिखना कुछ लोग हल्का-फुल्का काम समझते हैं, लेकिन मेरी समझ से यह अपेक्षाकृत  कठिन है। अनेक बड़े...

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