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ईश मिश्रा

राजा ने एक देश को कैसे किया तबाह

एक राजा था। प्रजा उसे आराध्य सा पूजती थी। प्रजा खुशहाल तथा धन-धान्य से संपन्न थी। राज्य के अधिकारी ईमानदार…

1 month ago

आत्मालोचना है बौद्धिक विकास की आवश्यक शर्त

यह अलग बात है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी जातियां बनी रहीं, लेकिन इसमें लोभ किसने दिया? सांप्रदायिक दिमाग…

2 months ago

मैकाले को भी मात दे देगी मोदी सरकार की नयी शिक्षा नीति

“हर ऐतिहासिक युग में शासक वर्ग के विचार ही शासक विचार होते हैं, यानि समाज की भौतिक शक्तियों पर जिस…

2 months ago

‘ब्लैक लाइव्स मैटर’: ऐतिहासिक संदर्भ में नस्लवाद और दासता के मायने

(वर्चस्ववाद की बुनियाद के मौलिक तत्वों में से एक है श्रेष्ठतावाद, जो यह दावा करता है कि वही श्रेष्ठ है…

3 months ago

आपातकाल को भी मात देती मोदी सरकार की तानाशाही

वेब अखबार जनचौक में छपी एक खबर के अनुसार, 2 दिन पहले आधी रात को वाराणसी में सीपीआई एमएल (लिबरेशन)…

4 months ago

भीड़ का कोई धर्म नहीं होता, न ही होती है कोई जाति और नस्ल

मार्टिन नीम्वैलर (1892-1984) ने जर्मनी में नाज़ी शासन के अंतिम 7 साल यातना शिविरों में बिताए, वे पेशे से प्रोटेस्टेंट…

6 months ago