Saturday, February 24, 2024

राम पुनियानी

मोदी की मंदिर यात्राएं वि-उपनिवेशीकरण नहीं है

हाल (22 जनवरी 2024) में अयोध्या के राममंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर अत्यंत भव्य समारोह आयोजित किया गया। इसके साथ ही देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर उत्तर भारत, में धार्मिकता के सामूहिक प्रदर्शन हुए। इस अवसर पर हमने देखा कि...

भगवान राम: दिव्य आत्मा से हिन्दू राष्ट्रवाद के नायक

इस साल 22 जनवरी को एक अत्यंत भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में भगवान राम की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की। इस अवसर पर हुए भाषणों में हमें बताया गया कि भगवान राम भारत की आत्मा हैं...

चुनाव और भारतीय मुसलमानों के समक्ष विकल्प

जैसे-जैसे 2024 के आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कुलीन वर्ग के कुछ मुसलमान अपने समुदाय से अपील कर रहे हैं कि भाजपा के बारे में अपनी राय पर वह एक बार फिर विचार करे (तारिक मंसूर, ‘मुस्लिम्स शुड...

भारत की आत्मा: संविधान या भगवान राम?

भगवान राम के मंदिर के उद्घाटन की धूम अब भी हम सबके कानों में गूंज रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन संपन्न किया और वे ही पूरे समारोह के केंद्र थे। ऐसा लग रहा था मानों वे राष्ट्र...

‘भारत के विचार’ को अतीत में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा

कई राज्यों में राज्यपाल रह चुके सत्यपाल मलिक अनेक बार कह चुके हैं कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी और भाजपा की जीत में पुलवामा और बालाकोट का काफी बड़ा योगदान था। उन्होंने यह भविष्यवाणी भी...

सांप्रदायिक राष्ट्रवाद के दौर में समावेशी भारत के विचार की पुनर्स्थापना

कई राज्यों में राज्यपाल रह चुके सत्यपाल मलिक अनेक बार कह चुके हैं कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी और भाजपा की जीत में पुलवामा और बालाकोट का काफी बड़ा योगदान था। उन्होंने यह भविष्यवाणी भी की...

यात्राएं, आन्दोलन और प्रजातंत्र की आत्मा

आने वाली 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन होना है। इसके लिए जिस स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और इसमें भागीदारी के लिए जिस बड़ी संख्या में लोगों को लामबंद किया जा रहा...

गांधी और बीजेपी-संघ के रामराज्य में फर्क

1980 के दशक में देश के इतिहास ने एक नया मोड़ लिया था। पहली बार, राममंदिर जैसा भावनात्मक मुद्दा आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे मूलभूत मुद्दों से ज्यादा अहम बन गया। बाबरी मस्जिद के ताले खोले जाने के बाद...

साझा विरासत स्थल और सांप्रदायिक एजेंडा

सन 1992 के छह दिसंबर को भारत में किसी भी विरासत स्थल पर सबसे बड़ा संगठित हमला हुआ था। यह हमला राज्य और उसके बल की मौजूदगी में हुआ। रामलला की मूर्तियाँ बाहर निकाली गईं और एक अस्थायी मंदिर...

बहुसंख्यकवादी राजनीति के जाल में फंस रहे हैं ईसाई

गत 25 दिसंबर, 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई ईसाइयों को क्रिसमस की बधाई देने और उनसे बातचीत करने के लिए अपने घर निमंत्रित किया। उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में ईसाई समुदाय के योगदान और प्रभु ईसा मसीह...

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