महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वोटर वेरीफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं है और यह तकनीकी रूप से भी व्यवहार्य नहीं है।
आयोग ने अदालत में एक हलफ़नामा दाखिल कर यह जानकारी दी। हलफ़नामा काँग्रेस नेता प्रफुल्ल गुडधे की नागपुर खंडपीठ के समक्ष याचिका पर दाखिल किया गया। याचिका में आयोग के स्थानीय निकाय चुनावों में वीवीपीएटी न इस्तेमाल करने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
गुडधे ने अपनी याचिका में कहा था कि वीवीपीएटी प्रणाली एक पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया के लिए आवश्यक है। याचिका में मांग की गई है कि यदि आयोग वीवीपीएटी का इस्तेमाल नहीं करता है तो चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलैट पेपर से करवाए जाएँ।
याचिका में यह भी कहा गया है कि हर नागरिक को अधिकार है कि वह यह जाने कि उसका वोट सही जगह गया है या नहीं।
बुधवार को सुनवाई के समय न्यायाधीश अनिल किलार नीत बेंच ने यह कहते हुए कि सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के अनुसार वीवीपीएटी का इस्तेमाल आवश्यक है, वीवीपीएटी मशीन इस्तेमाल न करने का कारण जानना चाहा।
आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट निर्णय केवल आम चुनावों पर लागू होता है, स्थानीय निकाय चुनावों पर नहीं।
सुनवाई गुरुवार को जारी रहेगी। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव 2 दिसंबर से होने वाले हैं।