एलगार परिषद मामला : गौतम नवलखा को दिल्ली में रहने की इजाजत मिली

बंबई उच्च न्यायालय ने मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार गौतम नवलखा को एलगार परिषद मामले के लंबित रहने के कारण नई दिल्ली में रहने की इजाजत बुधवार को दे दी। 

अदालत ने हालांकि नवलखा को निर्देश दिया कि वह अदालत की अनुमति के बिना दिल्ली से कहीं जा नहीं सकते और उन्हें अपना पासपोर्ट भी सम्बद्ध अधिकारियों के पास जमा कराना होगा।

न्यायाधीश भारती एच डाँगरे और श्याम सी चांडक की खंडपीठ ने यह आदेश नवलखा की उस अर्जी पर दिया जिसमें विशेष अदालत के जून 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। 

अदालत ने नवलखा पर दिल्ली में निवास के निकट कालकाजी पुलिस थाने में हर शनिवार रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया। उन्हें इसीके साथ राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआईए) अदालत में आरोप तय होने के समय और मुकदमे के दौरान सभी महत्वपूर्ण तारीखों पर उपस्थित होने का भी निर्देश दिया बशर्ते कि उन्हें पेशी से छूट न दी जाए। 

दिसंबर 2023 में नवलखा को उच्च न्यायालय ने जमानत दी थी लेकिन निर्देश दिया था कि वह मुंबई न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बिना अनुमति बाहर नहीं जाएंगे। उच्च न्यायालय के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने मई 2024 में मुहर लगाई जिसके बाद नवलखा को रिहा किया गया और वह अपनी पार्टनर सबा हुसैन के साथ मुंबई में रह रहे हैं। 

अदालत ने मंगलवार को संकेत दिया था कि नवलखा को राहत देने के पक्ष में है। अदालत ने कहा था कि एक 73 वर्षीय व्यक्ति अपने दोस्तों व समाज से दूर रहने पर अकेला महसूस कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा था कि नवलखा के भाग जाने की कोई आशंका नहीं है। 

नवलखा के वकीलों ने अदालत को बताया था कि मुंबई जैसे महंगे शहर में नवलखा का रहना संभव नहीं है, खासकर तब जब वह वित्तीय तौर पर दोस्तों व परिवार पर निर्भर हैं। मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है और उन्हें दिल्ली में रहने दिया जाए। 

एनआईए के वकील ने अर्जी का विरोध किया था और कि नवलखा को राहत देने से दूसरे राज्यों में रहने वाले अन्य आरोपी भी ऐसी राहत मांगने लगेंगे। 

मामला 31 दिसंबर 2017 का है जिसमें आरोप है कि भड़काऊ बयान दिए गए जिससे अगले दिन भीमा कोरेगाँव युद्ध स्मारक पर हिंसा भड़क उठी। नवलखा पर प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन के साथ काम करने व माओवादी विचारधारा फैलाकर सरकार को अस्थिर करने के आरोप हैं।

उन पर गैरकानूनी गतिविधि कानून (यूएपीए) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें अप्रैल 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले उन्हें 2018 से घर में नजरबंद किया गया था। उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए नवंबर 2022 में उन्हें नवी मुंबई के तलोजा जेल से निकालकर घर में नजरबंद किया गया था।

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