टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के पूर्व छात्र को जमानत मिली

पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय प्रोफेसर जीएन साईबाबा के स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजन विवाद को लेकर गिरफ्तार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के एक पूर्व छात्र को गुरुवार को मुंबई की एक अदालत ने जमानत दे दी।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी कोई सामग्री नहीं है जो उसे माओवादी या देश विरोधी मानसिकता से जोड़ती हो।

इसी मामले में पूर्व छात्र को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। एक और छात्र को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दी थी।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डीके खेडेकर ने कहा, “आरोपी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें देखते हुए मुझे पहली नजर में लगता है कि जांच अधिकारी के पास पर्याप्त समय था कि वह आरोपी की गतिविधियों और अपराध की जांच करता। लेकिन, प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ उसे देश की एकता के विरोध से जोड़ने के लिए कोई सामग्री नहीं है और युवक के करियर के बारे में सोचते हुए उसे जमानत देने पर विचार जरूरी हो जाता है क्योंकि उसके खिलाफ कुछ नहीं है सिवाय संदेह के तो उसे जेल में रखना अनुचित होगा।”

अदालत ने एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।

पूर्व छात्र को 7 अगस्त को सत्र न्यायालय के उसकी अग्रिम जमानत अर्ज़ी खारिज करते ही गिरफ्तार किया गया था। सत्र न्यायालय ने दो को छोड़कर अन्य सात छात्रों को राहत दे दी थी।

जमानत का विरोध करते हुए पुलिस ने आरोप लगाया कि इन दो छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे लगाये थे, जो 2020 से उत्तर पूर्व दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद हैं।

पुलिस ने छात्रों के पास से प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) सदस्यों द्वारा प्रकाशित किताबें बरामद होने का भी आरोप लगाया था।

बचाव वकील विजय हीरेमठ ने कहा कि बरामद साहित्य प्रतिबंधित नहीं है।

क्या था मामला?

आरोप है कि 12 अक्तूबर 2025 को संस्थान परिसर में साईबाबा को श्रद्धांजलि देने दस बारह छात्र बिना अनुमति के इकठ्ठा हुए। एक पेड़ पर साईबाबा की तस्वीर लगाई गई। उनकी लिखी कविताएं पढ़ी गईं और रेस्ट इन पीस के बजाय रेस्ट इन पावर (1967- फॉरेवर) लिखा गया।

शिकायत है कि अन्य छात्रों ने प्रशासन को बताया कि खिलाफ और इमाम की रिहाई के नारे लगाए गए थे।

साईबाबा को 2017 में माओवादी होने के आरोपों का दोषी करार दिया गया था लेकिन 2024 में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

(जनचौक ब्यूरो)

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