पटना। भाकपा माले ने आरोप लगाया है कि पिछले 25 साल से एनडीए चुनाव में बाढ़ से मुक्ति दिलाने का वादा कर वोट लेता है, चुनाव बाद लोगों को बाढ़ में छोड़ देता है।
यहाँ जारी बयान में पार्टी ने आरोप लगाया कि इस बार बिहार में बाढ़ से 14 जिलों के 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, 100 सड़कें और बांध टूट गए हैं और करीब 700 ग्रामीण सड़कें डूबी हुई हैं।
राजधानी का जिला पटना बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। बाढ़ में घिरे लोग तटबंधों और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों के सामने खुद के भोजन के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारा जुटाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई लाख एकड़ में लगी धान, मक्का व अन्य फसलें नष्ट हो गई हैं। कई जगहों पर लोगों की मृत्यु हो गई है। हमेशा की तरह सरकारी प्रयास नाकाफी हैं। चारों ओर तबाही मची हुई है।
पार्टी के बयान के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी चुनावी सभा में चीख चीख के कहे थे कि भाजपा को वोट कीजिए बिहार को बाढ़ से मुक्ति मिलेगी। पांच– पांच साल करते करते 25 साल हो गए हैं। गृह मंत्री निरीक्षण करने भी नहीं आए। बिहार सरकार राहत सामग्री वितरण एवं व्यवस्था के नाम पर लूट मचाई हुई है।
बयान में दावा किया गया है कि उनकी पार्टी राज्यव्यापी अभियान चलाते हुए बाढ़ पीड़ितों का हर संभव मदद राहत संग्रह अभियान चला रही है। जगह जगह पार्टी जिला कमिटियां मदद में जुटी हुई हैं।
भाकपा माले की राज्य से लेकर स्थानीय स्तर तक की पार्टी कमिटियां इस अभियान में सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं। पार्टी कार्यकर्ता विभिन्न इलाकों में आम नागरिकों से राहत के लिए सहयोग राशि एवं आवश्यक सामग्री का संग्रह कर रहे हैं।
पार्टी ने कहा कि नेपाल की त्रासदी और बिहार में आई बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों के सामने गंभीर मानवीय संकट पैदा किया है। ऐसे कठिन समय में राहत और बचाव कार्य को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं रखा जा सकता। समाज के सभी हिस्सों को मिलकर पीड़ितों की मदद के लिए आगे आना होगा।
पार्टी ने बिहार की जनता से अपील की है कि 11 से 14 सितंबर तक चल रहे राज्यव्यापी राहत संग्रह अभियान में सहयोग करें और आपदा की इस घड़ी में नेपाल एवं बिहार के बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करें।
भाकपा माले ने कहा कि आपदा के समय पीड़ितों के साथ खड़ा होना केवल मानवीय संवेदना का प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। पार्टी अपने स्तर से राहत कार्यों को आगे भी जारी रखेगी और प्रभावित लोगों की आवाज को मजबूती से उठाएगी। बिहार सरकार राहत कार्यों के नाम पर खाना पूर्ति कर रही है। बाढ़ से लोगों की मृत्यु हो रही है लेकिन सरकार चुप्पी साधे हुई है।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)