Monday, December 5, 2022

dawat

दावत, जहां मेजबान और मेहमान में गुफ्तगू तक नहीं!

दावत चाहे किसी धन कुबेर की हो या किसी निर्धन की, उसमें एक गर्म जोशी होती है, मिलने मिलाने का सिलसिला होता है और मेहमान और मेजबान के बीच संवाद होता है। पर कुछ दावतें ऐसी भी होती हैं...
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बचपन में मैंने कुएं में गिरी बाल्टियों को 'झग्गड़' से निकालते देखा है। इसे कुछ कुशल लोग ही निकाल...
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