Tuesday, January 18, 2022

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पश्चिम बंगाल: पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने से छोटे व्यापारियों की आफ़त, भरण पोषण के लाले पड़े

पिछले साल के दौरान महामारी में लॉकडाउन की वजह से आयी मुश्किलों से उबर ही नहीं पाएं थे कि सरकार ने एक बार फिर लॉकडाउन लगाकर आम आदमी की कमर तोड़ दी है और ऊपर से बढ़ती महंगाई अलग। अब...

लॉक डॉउन खत्म करना एक बड़ी चुनौती

सारा विश्व कोरोना महामारी की भयंकर चपेट में है। जिंदगी और मौत की सबसे कठिन लड़ाई लड़ी जा रही है। विश्व की सारी सरकारें अपने तमाम संसाधनों के साथ इस भयंकर महामारी से मुकाबला करने में पूरी ताकत से...

इतने बेबस क्यों हो गए हैं `इलीट-पावरफुल` डॉक्टर

भूखे-बेबस ग़रीबों के पिटते-गिरते काफ़िलों को सब देखते रहे। बहुतेरे एक आश्वस्ति की अनुभूति के साथ और कुछेक ज़रा अफ़सोस के साथ कि इन्हें तो झेलना होता ही है। चलिए, इनकी `क़िस्मत में तो यही बदा है` पर इलीट-पावरफुल...

कोरोना संकट में विफल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से शाबाशी!

कोरोना संकट पर उच्चतम न्यायालय में भी लगता है चीन्ह-चीन्ह के सुनवाई चल रही है, ताकि सरकार की कमजोरियों को वैध बनाया जा सके और हिडेन एजेंडो को कनून की आड़ लेकर न्यायिक आदेशों से लागू कराया जा सके।...

गुजराती वीआईपी, यूपी-बिहारी ढोर-डंगर!

क्या आप जानते हैं कि देश की एकता और अखंडता को लेकर जितना उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता जागरूक रहती है, उतना देश के किसी अन्य प्रदेश की नहीं। देश को सबसे ज्यादा सांसद भी यूपी-बिहार से आते...

त्रासदी की भयावहता के बीच लिखा जाएगा ज़िंदगी का नया फ़लसफ़ा

पिछले कुछ रोज़ से अपने मुल्क और समाज को कोरोना बीमारी से बचाने के मुहिम में, घर और परिवार की सुरक्षा के बीच, इस खतरनाक विषाणु को रोकने के प्रयास में सहयोग दे रहा हूँ। टीवी और सोशल मीडिया का साथ...

माले ने गृह सचिव से कहा, केरल में फंसे बिहार के मजदूरों की हो मदद

पटना। प्रधानमंत्री के अचानक घोषित लॉक डाउन के कारण बिहार के मजदूर जगह-जगह फंस गए हैं। केरल के त्रिसूर में पश्चिम चंपारण के 50 मजदूर फंसे हुए हैं। गाड़ियों के बंद हो जाने से वे बिहार नहीं लौट सकते।...

आदिवासी कोरोना से बचने को अपना रहे देसी तरीके

बस्तर। कहते हैं ग्रामीण भारत में संसाधनों की कमी नहीं होती। जरूरत के हिसाब से वो अपने आस-पास की चीजों से अपनी जरूरत पूरी कर लेते हैं। अभी देश में वैश्विक कोरोना वायरस का संक्रमण फैला हुआ है। इसकी...
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पुस्तक समीक्षा: सर सैयद को समझने की नई दृष्टि देती है ‘सर सैयद अहमद खान: रीजन, रिलीजन एंड नेशन’

19वीं सदी के सुधारकों में, सर सैयद अहमद खान (1817-1898) कई कारणों से असाधारण हैं। फिर भी, अब तक,...
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