Wednesday, October 27, 2021

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Maj Dhyanchand

‘खेल रत्न’ से क्यों जुदा हुआ ‘भारत रत्न’?

मेजर ध्यानचंद अपनी मौत के 42 साल बाद भी खेलों की प्रेरणा बनने को जिन्दा हैं तो यही उनकी अहमियत है। मगर, 1928 में ही ओलंपिक में 14 गोल कर ‘हॉकी के जादूगर’ का तमगा ले चुके इस अजर-अमर...
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सरदार उधम: आज देश को ‘राम मोहम्मद सिंह आज़ाद’ की ही जरूरत है

सरदार उधम अंत में एक सवाल उठाती है कि अंग्रेजों के शासन के दौरान भारत में लाखों लोग मारे...
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