Saturday, October 23, 2021

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Majaz Lakhnavi

जन्मदिन पर विशेषः मजाज़ की शायरी में रबाब भी है और इंक़लाब भी

एक कैफ़ियत होती है प्यार। आगे बढ़कर मुहब्बत बनती है। ला-हद होकर इश्क़ हो जाती है। फिर जुनून और बेहद हो जाए तो दीवानगी कहलाती है। इसी दीवानगी को शायरी का लिबास पहना कर तरन्नुम से (गाकर) पढ़ा जाए...
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बीएसएल प्रबंधन के खिलाफ बोकारो के विस्थापितों ने फिर शुरू किया मेन गेट पर अनिश्चितकालीन धरना

झारखंड के बोकारो में स्थित बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) के मेन गेट पर विस्थापितों ने 20 अक्टूबर से पुन:...
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