Market forces

2014 के बाद भारतीय पत्रकारिता का रूपांतरण : राजनीतिक अर्थशास्त्र, बाज़ारवाद और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व

लोकतांत्रिक समाज में पत्रकारिता को “चौथे स्तंभ” के रूप में देखा जाता है, जिसकी भूमिका केवल सूचना… Read More

“ठेके पर मुशायरा”: बाज़ार की ताकतों का साहित्य और संस्कृति के मानकों पर चोट

पिछले शनिवार को LTG ऑडिटोरियम में इरशाद खान ‘सिकंदर’ लिखित और दिलीप गुप्ता निर्देशित नाटक “ठेके पर… Read More