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अपनी जड़ों से उजड़ कर जिसके सपनों के महल खड़े किए, उसी ने दिखा दिया ठेंगा

रेल की पटरी पर मज़दूरों के क्षत विक्षत शव और फैली हुयी रोटियों ने हमारी व्यवस्था, नीति,… Read More

देश के बहुसंख्य आमजन-मेहनतकशों के लिए ऐसी सरकार, ऐसे राज्य के बने रहने का तर्क (Raison d’être) खत्म हो गया है !

कोरोना की आपदा तो वैश्विक है, लेकिन इससे जिस तरह हमारे देश में निपटा जा रहा है,… Read More

दिखावे बहुत हो चुके ! अब ज़रूरत है दिल, दिमाग और जवाबदेही से योजना बनाने की: अरुंधति रॉय

भारतीय अभिजात मीडिया और सत्ता-प्रतिष्ठान की बेनाम प्रवासी मजदूरों की  आकस्मिक और हृदय को छू जाने वाली… Read More

लॉकडाउन में जारी मज़दूरों के नरसंहार के ख़िलाफ़ सीपीआई (एमएल) और उसके संगठनों ने मनाया धिक्कार दिवस

पटना। लाॅकडाउन में हो रहे लगातार जनसंहार के लिए बिना प्लान किए लाॅकडाउन और प्रधानमंत्री मोदी की… Read More