झारखंड जनाधिकार महासभा की मांग: मानसून सत्र में PESA को पूर्ण रूप से लागू करे सरकार

रांची। झारखंड जनाधिकार महासभा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आगामी मानसून सत्र (1-7 अगस्त 2025) में पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज़ एक्ट (PESA) को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की है। यह पत्र 24 जुलाई को कैबिनेट बैठक से पहले जारी किया गया, जिसमें महासभा ने आदिवासी स्वशासन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए PESA की अहमियत पर जोर दिया।

PESA, जिसे 1996 में लागू किया गया था, पांचवीं अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और आदिवासी समुदायों को शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था। झारखंड, जो इस अनुसूची के अंतर्गत आता है, में अभी तक यह अधिनियम लागू नहीं हो सका है। 2022 में बने PESA नियमों पर भी विवाद रहा।

महासभा ने 2024 विधानसभा चुनाव में INDIA गठबंधन को मिले बहुमत का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने अबुआ राज की स्थापना के लिए PESA लागू करने का वादा किया था, लेकिन इस दिशा में उदासीनता बरती जा रही है। उन्होंने मांग की कि झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 (JPRA) में PESA के प्रावधानों को शामिल करने के लिए संशोधन किया जाए, जिसके बाद PESA नियमावली तैयार हो।

9 मई 2025 को सरकार ने PESA नियमावली का ड्राफ्ट जारी कर सुझाव मांगे थे, जिन्हें महासभा और अन्य संगठनों ने दिया। महासभा ने चेताया कि JPRA में संशोधन और नियमावली में देरी से ग्राम सभाओं के अधिकार सीमित रहेंगे और नौकरशाही का असंवेदनशील रवैया जन असंतोष को बढ़ाएगा।

महासभा ने मांग की है कि 2025 मानसून सत्र में JPRA को संशोधित कर PESA नियमावली को जन सुझावों के साथ अधिसूचित किया जाए। इसके अलावा, अगले छह महीनों में झारखंड भूमि अधिग्रहण नियम, 2015 और झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 में भी PESA के अनुरूप संशोधन हो।

(प्रेस विज्ञप्ति)

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