उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त: कांवड़ियों का उत्पात फासीवादी अभियान का हिस्सा

यह अत्यंत खेदजनक है कि धर्म से जुड़ा होने के कारण कोई भी राजनेता, यहाँ तक कि विपक्षी दल भी, कांवड़ियों के उत्पात पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह जिम्मेदारी AIMIM के ऊपर छोड़ दी गई है। जिस मुख्यमंत्री ने मुसलमानों के लिए “लातों के भूत बातों से नहीं मानते” जैसे जुमले का इस्तेमाल किया, उनके राज्य में कांवड़ियों का यह उत्पात राज्य संरक्षित प्रतीत होता है और हिंदुत्व के व्यापक प्रोजेक्ट व रणनीति का हिस्सा है। वैसे तो उत्तर प्रदेश में सामान्य कानून व्यवस्था की स्थिति भी अत्यंत खराब है, लेकिन कांवड़ियों के उत्पात को राज्य का संरक्षण प्राप्त होना सांप्रदायिक फासीवादी उन्माद के खतरनाक आयामों को दर्शाता है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सामान्य कानून व्यवस्था की बदहाल स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। अपराधी खुलेआम हत्याएँ कर रहे हैं। भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश को “हत्या प्रदेश” बना दिया है। अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं रह गया है। राजधानी लखनऊ में भी खुलेआम हत्याएँ हो रही हैं।

उदाहरण के लिए, गोमती नगर में सोमवार को होटल कर्मचारी सुल्तानपुर निवासी दिवाकर यादव की दबंगों ने हत्या कर दी। इसी तरह, चंदौली में सोमवार की रात जिम संचालक अरविंद यादव की हत्या हो गई। प्रतापगढ़ के पट्टी तहसील में जमीन का बैनामा कराने आए दो भाइयों, अरुण तिवारी और आदित्य तिवारी, पर ताबड़तोड़ फायरिंग में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। पिछले बुधवार को संत कबीर नगर के ग्राम पंचायत करैली के प्रधान के पुत्र को हमलावरों ने दौड़ाकर गोली मार दी।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में प्रदेश में हर तरफ अराजकता व्याप्त है। अपराधी जहाँ चाहें, वहाँ हत्याएँ कर रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएँ रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। महिलाएँ और बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं। महिला अपराध की घटनाओं में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष पर पहुँच गया है। भाजपा सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। अराजक तत्व कानून की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं। कहीं सैनिकों की पिटाई हो रही है, कहीं आम जनता का अपमान किया जा रहा है। पुलिस मूकदर्शक बनी कानून व्यवस्था को तार-तार होते देख रही है। अन्याय और अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं।

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि भाजपा सरकार पुलिस-प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है। पुलिस से जनविरोधी कार्य करवाए जा रहे हैं। अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा को सत्ता से हटाकर कानून और संविधान के राज की स्थापना करेगी।

यह खेदजनक है कि विपक्षी दल और नेता, जो सामान्य कानून व्यवस्था पर तो बोलते हैं, कांवड़ियों के उत्पात पर चुप्पी साध लेते हैं।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान मारपीट की अनेक घटनाएँ सामने आई हैं। मुजफ्फरनगर में कांवड़ियों ने मामूली बातों पर राहगीरों से मारपीट की। रुड़की में वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की गई। यह मानना भोलापन होगा कि इन घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।

सच्चाई यह है कि कांवड़ियों का उत्पात सरकार द्वारा संरक्षित है। जब सरकार कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा करवाती है और थानों में उनके थके हुए पैरों की मालिश पुलिस से करवाती है, तो कोई प्रशासन उन पर कार्रवाई करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? जहाँ मामूली विवाद में राहगीरों के साथ मारपीट की गई और उनके वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया, वहाँ पुलिस ने घटना की सूचना मिलने पर भीड़ को शांत करने और पीड़ितों को बचाने तक ही अपनी भूमिका सीमित रखी। इससे अधिक की अपेक्षा पुलिस से इस संदर्भ में नहीं की जा सकती।

इन घटनाओं के वीडियो भी सामने आए हैं। मुजफ्फरनगर में गुरुवार को हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली जा रहे शिवभक्त कांवड़ियों की एक टोली शिव चौक पर पहुँची थी। इसी दौरान एक बाइक की साइड कांवड़ियों से लग गई, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। कांवड़ियों ने जल खंडित होने का आरोप लगाते हुए बाइक सवार की डंडों से पिटाई शुरू कर दी और बाइक में तोड़फोड़ की। पुलिस ने सूचना मिलने पर बाइक सवार और बाइक को कांवड़ियों के चंगुल से छुड़ाया और बड़ी मुश्किल से भीड़ को शांत किया।

रुड़की में भी इसी तरह का विवाद सामने आया। यह घटना हरिद्वार-रुड़की राजमार्ग पर बेलड़ा गाँव के पास हुई। कांवड़ियों ने एक कार चालक पर कांवड़ में टक्कर मारकर उसे खंडित करने का आरोप लगाया और हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कार चालक के साथ मारपीट की और कार को तहस-नहस कर दिया। कुछ कांवड़िए गंगाजल लेकर हरिद्वार से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। बेलड़ा गाँव के पास उन्होंने पीछे से आ रही स्कॉर्पियो कार के चालक पर आरोप लगाया कि उसकी गाड़ी की टक्कर से उनकी कांवड़ खंडित हो गई। इसके बाद कांवड़ियों ने कार चालक के साथ मारपीट शुरू कर दी और कार में तोड़फोड़ की। आसपास के लोगों ने ड्राइवर को बचाया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुँचने से पहले ही कांवड़ियों ने कार को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

हरिद्वार के बहादराबाद थाना क्षेत्र में कांवड़ से कार टकराने पर कांवड़ियों ने लाठी-डंडों से हमला किया। कांवड़ियों और उनके साथियों ने कार पर डंडों से हमला किया और कार सवारों को बाहर निकालकर पीटा। शांतरशाह चौकी इंचार्ज खेमेंद्र गंगवार के अनुसार, इस संबंध में केस दर्ज किया जा रहा है और तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। ये तीनों कांवड़िए गंगोह, सहारनपुर के रहने वाले हैं। हालाँकि, यह सतही कार्रवाई दिखावे तक सीमित है। यह पूरा मामला उग्र और आक्रामक भीड़ तैयार करने का है, जो आक्रामक हिंदुत्व के सैन्यीकरण अभियान का हिस्सा प्रतीत होता है।

उत्तर प्रदेश में एक अध्यापक को इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि वे छोटे बच्चों को कांवड़ उठाने के बजाय पढ़ाई के लिए कविता सुना रहे थे। विडंबना यह है कि वे स्वयं ABVP से जुड़े थे, जिसके कारण शायद उनकी बड़ी सजा टल गई। यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में सामान्य कानून व्यवस्था की स्थिति बदहाल है, लेकिन जहाँ कहीं भी संभावना दिखती है, सरकार उसे धार्मिक रंग दे देती है और एक सांप्रदायिक नैरेटिव तैयार कर देती है।

इससे आम हिंदू जनमानस में यह संदेश जाता है कि सरकार मुसलमानों के खिलाफ सख्ती कर रही है और हिंदू प्रभुत्व वाला राज्य चला रही है। बुलडोजर को इस रणनीति का राष्ट्रीय प्रतीक बना दिया गया है। इसके जरिए योगी आदित्यनाथ को नरेंद्र मोदी के भावी उत्तराधिकारी और हिंदुत्व के पोस्टर ब्वॉय के रूप में पेश किया जा रहा है।

विपक्ष और नागरिक समाज को शुतुरमुर्गी अवसरवाद की बजाय कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार की इस रणनीति का पर्दाफाश करना होगा। प्रदेश में कानून के राज की स्थापना के लिए एक सशक्त मुहिम छेड़ने की आवश्यकता है।

(लाल बहादुर सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं)

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