चीफ जस्टिस बी आर गवई ने जूता कांड के तीन दिन बाद इस मुद्दे पर बात की। अदालत कक्ष में उन्होंने कहा, “मेरे साथी और मैं सोमवार को हुई घटना से स्तब्ध हो गए थे लेकिन अब हमारे लिए वो बीता हुआ समय यानी इतिहास का एक पन्ना या अध्याय है।”
यह टिप्पणी एक चर्चा के दौरान आई जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन भी शामिल थे, जिन्होंने एक दशक पहले हुई ऐसी ही एक घटना को याद किया। उन्होंने कहा, “मैंने भी इस पर एक लेख लिखा था… 10 साल पहले पड़ोसी अदालत में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वहाँ के दो न्यायाधीशों ने अवमानना शक्तियों का प्रयोग करते समय किस प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए, इस पर अलग-अलग विचार रखे थे।”
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां, जो पीठ का भी हिस्सा थे, ने इस हमले पर अपनी कड़ी असहमति व्यक्त करते हुए कहा, “इस पर मेरे अपने विचार हैं। वह भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं, यह कोई मज़ाक की बात नहीं है!” मुख्य न्यायाधीश के अपराधी, 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई न करने के फैसले पर न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा, “मुझे इसके लिए कोई खेद नहीं है; यह संस्था का अपमान है।”
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा, “वर्षों से न्यायाधीश के रूप में, हम कई ऐसे काम करते हैं जो दूसरों को उचित नहीं लगते, लेकिन इससे हमारे किए के बारे में हमारी राय नहीं बदलती।” भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वकील का कृत्य “पूरी तरह से अक्षम्य” था और उसे केवल मुख्य न्यायाधीश की “उदारता” के कारण ही बरी किया गया।
जूता फेंकने के प्रयास के मामले में प्रधान न्यायाधीश ने अपना रुख दोहराते हुए कहा, ‘हमारे लिए यह एक भुलाया जा चुका अध्याय है.
इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने एडवोकेट राकेश किशोर की अस्थायी सदस्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। राकेश किशोर ने 6 अक्टूबर को अदालत की कार्यवाही के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया था। बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से यह फैसला लेते हुए प्रस्ताव पारित किया, जिसमें वकील के इस गंभीर कदाचार का संज्ञान लिया गया।