उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सभी भर्तियों में आरक्षण के नियमों के सख्ती से पालन का फरमान जारी किया है।
प्रदेश के प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम देवराज ने इस बारे में एक विस्तृत आदेश जारी किया है, जिसमें राज्याधीन सेवाओं में सभी तरह के आरक्षण की व्यवस्थाओं का पालन कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
हाल ही में पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने लेखपालों की भर्ती को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि लेखपालों की भर्ती में पिछड़ों का आरक्षण पर्याप्त नहीं दिया जा रहा है। मामले की जांच हुई तो यह बात सच साबित हुई और नए सिरे से आरक्षण की व्यवस्था को लागू किया गया। इस मामले में सरकार की खासी किरकिरी हुई थी, जिसके बाद यह आदेश जारी किया गया है।
प्रमुख सचिव कार्मिक और नियुक्ति एम देवराज ने बताया कि यह आदेश उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम-1994, उत्तर प्रदेश लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020, उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम-1993 तथा अन्य संबंधित नियमावलियों के आधार पर जारी किया गया है।
इन कानूनों के तहत अनुसूचित जाति को 21%, अनुसूचित जनजाति को 2%, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% का आरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा शारीरिक रूप से विकलांगों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों, भूतपूर्व सैनिकों तथा महिलाओं को विशेष प्रावधान दिए गए हैं। उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए भी 2022 की नियमावली और 1999 के शासनादेश के अनुसार आरक्षण लागू है।
यह कदम हाल ही में लेखपाल भर्ती (7994 पदों) सहित अन्य भर्तियों में आरक्षण को लेकर उठे विवादों के बाद आया है। लेखपाल भर्ती के प्रारंभिक विज्ञापन में ओबीसी के पद कम दिखाए जाने पर व्यापक विरोध हुआ था, जिसके बाद संशोधन कर ओबीसी के लिए सैकड़ों अतिरिक्त पद बढ़ाए गए।
समाजवादी पार्टी ने भी सरकार पर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के हक छीनने का आरोप लगाया था।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले 2027 में होने वाले हैं लेकिन पंचायत चुनाव 2026 में होने हैं, जिसे देखते हुए योगी सरकार सक्रिय दिखायी दे रही है।
इस बीच उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में कोर्स कोआर्डिनेटर की भर्ती प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कोर्स कोआर्डिनेटर के पद के लिए पीसीएस मेन परीक्षा का पास होना अनिवार्य था। लेकिन, कई ऐसे लोगों को भर्ती कर लिया गया जो पीसीएम मेन परीक्षा पास नहीं कर सके थे।
मामले में गोमती नगर थाने में नियमों का उल्लंघन कर नियुक्तियां कराने वाली आउटसोर्स कंपनी अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड और संबंधित आवेदकों के खिलाफ षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज और नियम विरुद्ध नियुक्ति के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि 29 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रदेशभर में संचालित कोचिंगों में आउटसोर्स पर लगे कोचिंग कोर्स कोऑर्डिनेटर की भर्ती में अनियमितता की शिकायत मिली थी। इसे गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच कराई गई, जिसमें भर्ती से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की गई।
नियमानुसार कोर्स कोऑर्डिनेटर पद के लिए यूपी पीसीएस मुख्य परीक्षा पास होना अनिवार्य था। जांच में यह सामने आया कि कई ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया, जिन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। कुल 69 अभ्यर्थियों की जांच में केवल 21 अभ्यर्थी ही पात्र पाए गए।
जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि अपात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिलाने के लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इस मामले में आउटसोर्सिंग कंपनी को प्रथमदृष्टया दोषी माना गया।
राज्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी दस्तावेज सत्यापन की थी, उनकी भूमिका और लापरवाही की प्रशासनिक जांच कराई जाएगी। साथ ही भविष्य में होने वाली सभी आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में पुलिस वैरिफिकेशन और डॉक्युमेंट वैरिफिकेशन अनिवार्य होगा। वर्तमान में कार्यरत सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया जाएगा।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)