ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो मौनी अमावस्या के दिन से ही प्रशासन द्वारा पालकी से स्नान करने जाने पर रोक लगाए जाने के बाद से अपने शिविर के बाहर पालकी पर धरने पर बैठे हुए थे, की तबियत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई। तेज बुखार और बदन दर्द के कारण वह सुबह पालकी से उतरे और अपनी वैनिटी वैन में चले गए। शिष्यों ने बताया कि तब से वह वैन से बाहर नहीं आए हैं। उन्हें तेज बुखार है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन पालकी से करीब 200 शिष्यों के साथ संगम स्नान करने जा रहे थे, जब मेला प्रशासन ने भीड़ का हवाला देकर संगम स्नान पर रोक लगा दी थी। प्रशासन का कहना था कि पैदल जाकर के आप संगम स्नान करिए, लेकिन शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ संगम के नजदीक तक पालकी से जाना चाह रहे थे। इसी बात को लेकर के शंकराचार्य और मेला प्रशाशन के बीच 3 घंटे तक टकराव हुआ था।
आरोप है कि शंकराचार्य और उनके शिष्यों ने बैरिकेडिंग तोड़कर प्रतिबंधित रास्ते से प्रवेश किया, जिसके बाद प्रशासन ने शिष्यों को वहां से हटाया। शंकराचार्य का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उनके शिष्यों को मारा पीटा उनके साथ अभद्रता की उनकी चोटी पड़कर खींची।
पुलिस प्रशासन ने महाराज अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी खिंचवाकर उनके शिविर के बाहर लाकर छोड़ दी। तब से (पिछले पाँच दिन से) अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर पालकी पर धरना दे रहे थे।