नीट-यूजी परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला : इस साल ओएमआर शीट से ही होगी परीक्षा

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें 21 जून को होने वाले राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट)-यूजी 2026 के री-टेस्ट को मौजूदा पेन एंड पेपर फॉर्मेट के बजाय कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड से कराने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की है।

यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और अरविंद कुमार की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। शुरू में ही बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील को साफ कर दिया कि वह इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं है।

अदालत के रूख के साथ साफ हो गया कि इस साल होने वाली नीट-यूजी री-टेस्ट परीक्षा पुराने पेन-पेपर मोड यानी ओएमआर शीट के माध्यम से ही आयोजित की जाएगी।

याचिका आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, आईएमए के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए तत्काल कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट फ्रेमवर्क लागू किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि वह अगले साल से नीट परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड मॉडल पर ले जाने की दिशा में तैयारी कर रही है। इससे संकेत मिलते हैं कि भविष्य में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन फिलहाल इस साल की परीक्षा पुराने पेन-पेपर मोड में ही होगी।

नीट पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार निगरानी बनाए हुए है। पिछले सप्ताह कोर्ट ने इस मामले में एनटीए और शिक्षा मंत्रालय से विस्तृत जवाब भी मांगा था। परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और छात्रों के भविष्य से किसी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

इससे पूर्व 29 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक की वजह से नीट-यूजी 2026 के कैंसिल होने को “ट्रॉमेटिक” बताया, और कहा कि यह बहुत ज़्यादा भावनाओं और उम्मीदों का इन्वेस्टमेंट है, साथ ही लीक के बारे में कई सवाल भी पूछे।

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जवाबदेही आवश्यक है – जिम्मेदारी पहचाने जाने योग्य व्यक्तियों द्वारा उठाई जानी चाहिए और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से सीखने का आग्रह किया, जिसने कभी ऐसे उल्लंघन का सामना नहीं किया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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