दिल्ली में नरेंद्र, मुंबई में देवेंद्र जनाक्रोश का सामना करने में विफल?

नीट पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में जंतर मंतर पर एक महीने चले प्रदर्शन के बाद 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बर्बरता ने मुंबई में भी छात्रों युवाओं के प्रदर्शनों की बाढ़ सी ला दी है।

वैसे प्रदर्शन महाराष्ट्र भर में हो रहे हैं लेकिन मुंबई का खास ज़िक्र करना इसलिए ज़रूरी है कि यहां पुलिस प्रदर्शन से पहले ही हाउस अरेस्ट करने से लेकर, प्रदर्शन स्थल पर लोगों के जुटते ही उन्हें हिरासत में लेने, घंटों पुलिस थानों में बिठाये रखने, मामले दर्ज करने जैसे सारे हथकंडे अपना रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस इंस्टाग्राम और ट्विटर आदि सोशल मीडिया पर निगरानी रख रही है और हैशटैग, कीवर्ड के ज़रिए कार्यकर्ताओं को चिह्नित कर उन्हें हतोत्साहित करने के लिए प्रदर्शन से पहले ही फ़ोन करने, प्रदर्शन स्थलों के निकट रेलवे स्टेशन/मेट्रो स्टेशन से ही समूह में दिख रहे लोगों को हिरासत में ले रही है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी प्रदर्शनों को लेकर चेतावनी जारी कर चुके हैं।

मामले दर्ज करने का कारण पुलिस परमिशन न लेना बताया जा रहा है लेकिन सच यही है कि परमिशन मांगने पर दी नहीं जाती और आजाद मैदान जैसे स्थलों पर भी, जो विरोध प्रदर्शनों के लिए तय जगह है, परमिशन देकर भी ऐन समय रद्द कर दी जाती है।

नीट पेपर मुद्दे पर मुंबई में प्रदर्शनों का सिलसिला भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से जबरन हटाने और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने के बाद शुरू हुआ।

मुंबई प्रेस क्लब के बाहर कुछ छात्र युवा जमा हुए लेकिन आजाद मैदान पुलिस ने मिनटों में उन्हें वहां से हटा दिया। इस घटना को लेकर मामला भी दर्ज किया गया है।

फिर 20 जुलाई को भी मुंबई में प्रदर्शन हुए, जो दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता के विरोध में हुए थे।

यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि विपक्षी पार्टियों की तरफ से भी प्रदर्शन करवाए जा रहे हैं या इनके नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शनों में शिरकत कर रहे हैं लेकिन प्रदर्शनों में अच्छी खासी संख्या उन छात्रों, युवाओं, महिलाओं की भी है जो प्रत्यक्ष तौर पर राजनीतिक पार्टियों से नहीं जुड़े हुए हैं।

शिवसेना (उद्धव ठाकरे), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी पार्टियों ने दादर के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का आयोजन करवाया। वंचित बहुजन आघाड़ी ने 23 जुलाई को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और कांग्रेस भी प्रदर्शन कर रही हैं। 

बुधवार को दादर (जहां हजारों की भीड़ जुटी), जुहू, चेम्बूर आदि इलाकों में प्रदर्शन हुए।

इससे पूर्व मंगलवार को दादर, चेंबूर में प्रदर्शन हुए। सोमवार को पुलिस ने दादर के चैत्यभूमि में प्रदर्शन को लेकर सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया और बाद में नोटिस भेजे और मामले दर्ज किए।

इसके अलावा मुंबई में गुरुवार से धारा 163 (पहले 144) लगाई गई है जिसके तहत 6 अगस्त तक पांच या अधिक लोगों के कहीं जमा होने पर पाबंदी है।

(जनचौक ब्यूरो)

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