सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गाजियाबाद पुलिस आयुक्त को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि पत्रकार अभिषेक उपाध्याय, जिनके ख़िलाफ़ कथित रोड रेज घटना में मामला दर्ज है, के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) से किस तरह की जानकारी मांगी गई है और वह जानकारी किस एफआईआर की जांच के लिए आवश्यक है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ कर रही थी। न्यायाधीश बागची ने सवाल किया, “रोड-रेज मामले में आपको आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट की जरूरत क्यों है?” पीठ ने मुख्य रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट से कितनी व्यापक जानकारी मांगी है और उसका संबंधित एफआईआर की जांच से क्या संबंध है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस का नोटिस बहुत व्यापक है। एफआईआर 18 अगस्त की कथित रोड-रेज घटना से जुड़ी है लेकिन पुलिस ने 1 जून से सोशल मीडिया अकाउंट से संबंधित जानकारी मांगी है।
उन्होंने यह भी कहा कि अकाउंट में लॉग-इन करने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल डिवाइस की जानकारी तक मांगी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने आशंका जताई कि इस तरह की जानकारी मांगने का इस्तेमाल पत्रकार के स्रोतों तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल जानकारी तक पुलिस की पहुंच को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की मांग की।
सीजेआई सूर्यकांत ने डिजिटल जानकारी जुटाने की सीमा और उससे जुड़ी निजता चिंताओं पर सवाल उठाया।उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान पुलिस के हाथ कोई गोपनीय जानकारी लगती है और उसे रिकॉर्ड पर लाया जाता है, तो इससे व्यक्ति की निजता प्रभावित हो सकती है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल फुटप्रिंट की जांच की सीमा और उसके लिए उचित दिशानिर्देश क्या होने चाहिए, इस पर विचार किया जाना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता ने कहा कि याचिका मूल रूप से एफआऐआर रद्द करने की मांग कर रही है और शिकायतकर्ता की चोटों से संबंधित रिपोर्ट भी मौजूद है, जिसके आधार पर जांच की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पत्रकार के खिलाफ दो अन्य एफआईआर भी दर्ज हैं। वहीं, पत्रकार की ओर से कहा गया कि वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उनके वकील ने राज्य के अपर महाधिवक्ता के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने की भी इच्छा जताई।
गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय को दंडनीय कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण दिया था और पुलिस को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
हाल ही में दाखिल एक अन्य हलफनामे में उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि यूपी पुलिस की एक टीम उनकी तलाश में पूर्व दिल्ली मेयर फरहाद सूरी के आवास में दाखिल हुई थी। उन्होंने दावा किया कि इस घटना को उनके खिलाफ पुलिस की अन्य कार्रवाइयों के साथ देखा जाए तो जांच शक्तियों के कथित चयनात्मक या अनुपातहीन इस्तेमाल की न्यायिक जांच जरूरी है।
पत्रकार का आरोप है कि एफआईआर का वास्तविक कारण उनकी राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले समेत अन्य मामलों की रिपोर्टिंग है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)