दिल्ली मजिस्ट्रेट ने नेहा बोरा के ‘पीस-बॉन्ड’ मामले में पुलिस को एफआईआर का विवरण देने का आदेश दिया

नई दिल्ली में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वे आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को उन छह एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध कराएं, जिनका जिक्र उनके आपराधिक रिकॉर्ड के तौर पर ‘पीस-बॉन्ड’ की चल रही कार्यवाही में किया गया है। मजिस्ट्रेट ऋतु राज द्वारा बुधवार को जारी इस आदेश के अनुसार, ये दस्तावेज 20 नवंबर तक बचाव पक्ष को सौंपे जाने चाहिए।

अदालत ने यह कदम बोरा के वकील, अधिवक्ता अभिक चिमनी के अनुरोध पर उठाया है। वकील का तर्क था कि पुलिस द्वारा पहले उपलब्ध कराए गए दस्तावेज अपर्याप्त थे। बचाव पक्ष के अनुसार, ‘शो-कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) के साथ दिए गए दस्तावेजों में उन छह एफआईआर का कोई विस्तृत विवरण नहीं था, जिनके आधार पर अधिकारी यह कार्रवाई कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान, पुलिस की ओर से कानूनी सलाहकार प्रशांत प्रकाश और भगवान दास पेश हुए। उन्होंने मजिस्ट्रेट को बताया कि ये एफआईआर संवेदनशील प्रकृति की हैं। पुलिस के कानूनी प्रतिनिधियों ने इस अनुरोध पर काम करने के लिए कुछ और समय मांगा और अदालत को भरोसा दिलाया कि अगली सुनवाई की तारीख तक जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

यह विवाद मुख्य रूप से इस बात पर है कि ‘पीस-बॉन्ड’ की कार्यवाही के समर्थन में पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूत कितने पर्याप्त हैं। इस सप्ताह के आदेश से पहले, पुलिस ने 17 अक्टूबर की एक ‘कलंदरा’ (पुलिस रिपोर्ट) और तीन ‘जनरल डायरी’ प्रविष्टियां अदालत में जमा की थीं। हालांकि, बचाव पक्ष का कहना है कि इन दस्तावेजों में उन छह एफआईआर का न तो कोई ठोस विवरण था और न ही उनके संदर्भ के बारे में कोई जानकारी दी गई थी, जिनका जिक्र शुरुआती नोटिस में किया गया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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