मिर्जापुर (उप्र)। संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर देशभर में एसआईआर के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन देने के क्रम में भारतीय किसान यूनियन जनपद मिर्जापुर द्वारा जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी के नेतृत्व में तहसील मुख्यालय चुनार में प्रदर्शन किया गया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत में लोकतंत्र और सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए किसान एकजुट हो रहे हैं। हमारी मांग है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को तुरंत रद्द किया जाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए। साथ ही, बिना किसी पारदर्शिता के सूची से हटाए गए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार को बहाल किया जाए। इसके अलावा, 2023 के अधिनियम में संशोधन किया जाए और चयन पैनल में कैबिनेट मंत्री की जगह भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी ने कहा, “किसान व्यापक चुनावी सुधारों की भी मांग करते हैं, ताकि ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व’ लागू हो सके, धनबल और बाहुबल पर रोक लगे, और चुनावों के लिए ‘राज्य द्वारा फंडिंग’ को कानूनी रूप दिया जा सके।”
वक्ताओं ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने अपनी संवैधानिक शपथ का उल्लंघन किया है, इसलिए उन पर मुकदमा चलना चाहिए और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मुख्य चुनाव आयुक्त को बचा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सत्ताधारी पार्टी (भाजपा) को सत्ता में बनाए रखने में मदद करने के लिए, असली नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने जैसा गंभीर अपराध किया है। वक्ताओं ने कहा कि नियमों को औपचारिक रूप से बदलने का अधिकार केवल संसद के पास है। जब तक संसद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नहीं चलाती, तब तक प्रधानमंत्री अपनी कैबिनेट के सामने खड़े इस गंभीर संवैधानिक संकट से बाहर नहीं निकल सकते।
वक्ताओं ने कहा कि किसान, एसआईआर के मुद्दे पर विरोध कर रहे लोगों (विशेषकर छात्रों और युवाओं) का समर्थन करते हैं और यह विरोध प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस और आरएसएस-भाजपा से जुड़े आपराधिक तत्वों द्वारा नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों (जिनमें युवा महिला छात्राएं भी शामिल हैं) के साथ किए गए क्रूर दमन और अत्याचार के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि महिला छात्रों और पत्रकारों का यौन उत्पीड़न पूरे देश के लिए चौंकाने वाला और शर्मनाक है। अगर मोदी सरकार प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रखती है, तो किसानों को उनकी सुरक्षा के लिए आगे आना पड़ेगा। किसानों ने प्रदर्शनकारियों पर हमलों की जाँच करने, दोषियों को गिरफ्तार करने और वर्दीधारी तथा असामाजिक तत्वों, दोनों तरह के अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की।
अन्य वक्ताओं ने कहा, विरोध प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है, और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करना संविधान और कानून के शासन के खिलाफ है। हम न्यायपालिका (जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है) की कड़ी आलोचना करते हैं कि उसने राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रहे व्यापक अपराधों पर स्वतः संज्ञान नहीं लिया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत में कोई भी कानून या नियम पुलिस को नागरिकों को “हाउस अरेस्ट” (नज़रबंद) में रखने की अनुमति नहीं देता है। लेकिन गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश पर आपकी सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर रही है, खासकर उन राज्यों में जहां “डबल इंजन सरकारें” हैं। जहां पुलिस निजी घरों में घुसकर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से “हाउस अरेस्ट” कर रही है, ताकि उन्हें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार से वंचित किया जा सके। यह भारत के संविधान द्वारा दिए गए लोगों के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत को एक ‘पुलिस स्टेट’ (पुलिस राज्य) बना दिया है और कहा, “हम इस ‘राज्य प्रायोजित आतंक’ का कड़ा विरोध करते हैं और मांग करते हैं कि नागरिकों की निजता और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को रोकने के लिए आप तुरंत कदम उठाएं।”
सभा के दौरान इसके अतिरिक्त जनपद स्तरीय मुख्य समस्याओं को भी उठाते हुए प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे को जनहित के ख़िलाफ़ बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग भी की गई। धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम में प्रदेश महासचिव प्रहलाद सिंह, मंडल अध्यक्ष अनिल सिंह, जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी, जिला महासचिव वीरेंद्र सिंह, मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सिंह, मंडल उपाध्यक्ष परशुराम मौर्य, स्वामी दयाल सिंह जिला कोषाध्यक्ष, प्रदीप कुमार सिंह, राम महाल सिंह, सावित्री देवी जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा, मुन्नू प्रसाद गुप्ता, जमुना प्रसाद सिंह, बबलू , संतोष कुमार सिंह, रामशरण सिंह, श्याम केर पाल, चूल्हन बिंद, राम राज, नंदलाल भारती, मुलायम यादव, हृदय शर्मा व अन्य लोग उपस्थित रहे।
(स्वतंत्र पत्रकार शालिनी जायसवाल की रिपोर्ट)