राज्य

बलात्कार के आरोपी बाबा के आगे निर्वाचित सरकार नतमस्तक!

कैसा भयानक दृश्य है कि लोकतंत्र में एक निर्वाचित सरकार ने संविधान को दुष्कर्म के आरोपी विवादास्पद-शक्तिशाली `बाबा` के… Read More

मनमाफ़िक ख़बरें न लिखने पर शामली में दलित पत्रकार का पुलिसिया उत्पीड़न!

पत्रकारों ने जुलूस निकालकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया शामली। एक दलित पत्रकार को पुलिस के मनमाफ़िक ख़बर… Read More

हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष का बेटा छेड़छाड़ के मामले में गिरफ़्तार

चंडीगढ़। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला को एक युवती… Read More

आज की सुबह पहले जैसी न थी, हवाओं में खून से सनी गंध महसूस की जा सकती थी

चालीस साल की बसासत का एक शांतिप्रिय शहर पल भर में तहस नहस हो जाता है। 28 लोगों के खून से सनी मेरे इस खूबसूरत शहर की मिट्टी का दर्द क्यों कोई जाने। उन्हें बस जुमलेफेंकने आते हैं। अजीबो-गरीब तर्क देने आते हैं। वे कुर्सी पर काबिज रह कर भी जवाबदेही से बचना चाहते हैं। प्रश्न गहरे हैं और हमारी बेचैनियां उस से भी ज्यादा गहरी हैं। क्योंकि उन प्रश्नोंके उत्तर हमारे पास नहीं हैं।  हमने एक अरसे से एक आदत बना रखी है कि धर्म और संस्कृति से जुड़े सवालों को हम या तो अंधभक्ति से सुलझाना चाहते हैं या राजनेताओं की बिसात परबिछी शतरंज की चालों के द्वारा। दोनों तरीकों से प्रश्न और उलझते हैं।  हम और अकेले हो जाते हैं। संस्कृति के मानवीय मूल्य तक हमारा साथ छोड़ने की हद तक चले गए दिखाई देते हैंऔर हमारे साथ जो खेल खेला जा रहा होता है उसके नायक या तो व्याभिचारी बाबा होते हैं या भ्रष्ट राजनेता। इन दोनों की मिलीभक्त से मेरे प्रिय शहर का जो हाल हुआ उसे मैंने अपनीआँखों से देखा। इन आँखों में अब आंसू भी नहीं हैं। आँखे बस घूर रही हैं अजनबी हो गयी मानवीय संवेदनाओं को। किस के पास इसका उत्तर है? मन बहुत आहत है… कल के घटनाक्रम से मन आहत है। आज की सुबह पहले जैसी… Read More