महंत नरेंद्र गिरि की मौत की सीबीआई ने शुरू की जांच

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में सीबीआई ने गुरुवार को एफआईआर दर्ज की थी। इस केस की जांच सीबीआई की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच करेगी। इसके लिए एएसपी केएस नेगी की अगुआई में सीबीआई की 20 लोगों की टीम बनाई गई है। जांच एजेंसी ने प्रयागराज के जॉर्जटाउन थाने में दर्ज एफआईआर को ही आधार बनाया है। इसमें नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके लिए सीबीआई की टीम प्रयागराज पहुंच रही है।

सीबीआई टीम ने प्रयागराज पुलिस के बड़े अफसरों और मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम से भी बात की है। एसआईटी टीम सीबीआई को जांच सौंपने से पहले शुक्रवार को आखिरी बार महंत नरेंद्र गिरि के बाघम्बरी मठ पहुंची और उन सारे बिंदुओं पर दोबारा जांच की जो उसे सीबीआई को बताने हैं। सीबीआई को हरिद्वार के उस शख्स की भी तलाश है, जिसने नरेंद्र गिरि से कहा था कि उनका शिष्य आनंद गिरि उनकी वीडियो वायरल करने वाला है, जिसकी वजह से उन्होंने खुदकुशी कर ली।

महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि जब हरिद्वार से सूचना मिली कि एक दो दिन के अंदर आनंद गिरि कंप्यूटर के माध्यम से मोबाइल से किसी लड़की या महिला के साथ गलत काम करते हुए मेरी फोटो लगाकर फोटो वायरल कर देगा।मैंने सोचा था कि कहां तक सफाई दूंगा। मैं तो बदनाम हो जाऊंगा, इसलिए मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच के सिलसिले में अब सीबीआई के सामने बड़े सवाल ये हैं कि नरेंद्र गिरि की मौत हत्या है या आत्महत्या?सुसाइड नोट नरेंद्र गिरि ने लिखा है या हत्यारे का काम है, क्योंकि नरेंद्र गिरि के लिखने की क्षमता पर प्रश्नचिन्ह है?फिर सवाल है कि नरेंद्र गिरि से किसने कहा कि उनकी वीडियो वायरल होने वाली है?क्या आनंद गिरि वाकई कोई वीडियो वायरल करने वाले थे?नरेंद्र गिरि की कथित फोटो या वीडियो की सच्चाई क्या है?आनंद गिरी को उत्तराधिकारी बनाने के बाद नरेंद्र गिरि ने वसीयत क्यों बदली?आनंद गिरि से नरेंद्र गिरि के झगड़े की असल वजह क्या है?मठ की संपत्तियों को बेचने की क्या हकीकत है?

सीबीआई को यह जाँच भी करनी है कि क्या आनंद गिरि और महंत नरेंद्र गिरि के बीच झगड़े की आड़ में किसी अन्य हत्यारे ने तो नरेंद्र गिरि को ठिकाने नहीं लगा दिया और ऐसा सुसाइड नोट प्लांट कराया जिससे आनन्द गिरि और हनुमान मन्दिर के पुजारी पितापुत्र ठिकाने लग जाएं और मनमाफिक व्यक्ति को मठ की गद्दी पर आसीन करा दिया जाये ताकि मठ की करोड़ों की जमीन को आसानी से हड़पा जा सके।

अपराधशास्त्र के जानकारों का कहना है कि मठ में बलबीर और बबलू से पुलिस और एसटीएफ ने कड़ाई से पूछताछ किया होता तो शायद सीबीआई जाँच की जरुरत ही नहीं पड़ती। यही दोनों महंत की मौत के चश्मदीद किरदार हैं।   

सीबीआई को यह जांच भी करनी है कि जिस कमरे में नरेंद्र गिरि ने कथित आत्महत्या की उससे अटैच वाशरूम का दरवाजा दूसरी और से खुलता है या नहीं और उसमें पहले से हत्यारे छिपे तो नहीं थे?मठ के सेवादारों के दरवाजा तोड़ने या धक्का देकर खोलने के बयान अलग अलग क्यों हैं? सीबीआई को यह जाँच भी करनी है कि पुलिस ने तत्काल पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया?40घंटे बाद पोस्टमार्टम क्यों कराया गया? इसके लिए किस आला पुलिस अधिकारी ने जार्ज टाउन थाने की पुलिस को आदेशित किया था?

जनचौक में रिपोर्ट छपने के बाद एसआईटी ने मठ के सारे सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिए हैं, जिन्हें वह सीबीआई को सौंपेगी। सीबीआई को यह जाँच भी करनी है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस ने ,फिर उसके बाद एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज को तुरंत कब्जे में क्यों नहीं लिया था और किस आला अधिकारी के कहने से ऐसी लापरवाही की थी?  

यूपी पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों- दो शिष्यों आनंद गिरि और आद्याप्रसाद और संदीप तिवारी को गिरफ्तार किया है। सीबीआई की यह प्राथमिकी तब दर्ज की गई है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने दो दिन पहले इसकी सिफारिश की थी। सरकार पर केंद्रीय जाँच एजेंसी से जाँच कराने के लिए काफ़ी ज़्यादा दबाव था।

चर्चा है कि महंत के मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई महंत से जुड़े लगभग दो दर्ज़न  किरदारों की कुंडली खंगालने में जुट गई है। इनमें महंत के कथित उत्तराधिकारी बलबीर गिरि से लेकर उनके शिष्य आनंद गिरि तक का नाम शामिल है। साथ ही पुलिस के कुछ अफसर और कुछ राजनेता, बिल्डर, भूमाफिया और महंत से लाखों करोड़ों से लभान्वित होने वाले/वाली लाभार्थियों के नाम भी सीबीआई की जांच सूची में हो सकते हैं।

महंत नरेंद्र गिरि पर उनके शिष्य आनंद गिरि ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने ड्राइवर विपिन सिंह को आलीशान मकान दिलाया था। जौनपुर का रहने वाला अभिषेक मिश्रा महंत नरेंद्र गिरि का गनर था। अब अभिषेक भी करोड़ों की संपत्ति का मालिक है, जबकि वह एक सामान्य पृष्ठभूमि का था। अभिषेक एक बड़ी संपत्ति का मालिक महंत जी के संपर्क में आने के बाद ही बना।

महंत ने अपने विद्यार्थी रामकृष्ण पांडेय को आलीशान मकान दिलाने के साथ ही बड़े हनुमान मंदिर में दुकान दिलाई थी। विद्यार्थी विवेक मिश्रा के नाम जमीन खरीदने के साथ ही उसका मकान बनवाया था। मठ में ही रहने वाले मनीष शुक्ला को करोड़ों रुपए का मकान दिलाने के साथ ही आनंद गिरि की फार्च्यूनर उसके नाम कराई थी। इसी तरह से उन्होंने मिथिलेश पांडेय को भी आलीशान मकान बनवाकर दिया था। ये सभी शिष्य भी अब सीबीआई के रडार पर हैं।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत की अब तक जांच कर रही एसआईटी के मुताबिक 20 सितंबर को मौत से पहले महंत की 18 लोगों से बातचीत हुई थी। इन 18 लोगों में हरिद्वार के 2 प्रॉपर्टी डीलरों के अलावा अन्य लोग थे। जिन लोगों से बात हुई थी, उनकी सूची SIT अब CBI को सौंपेगी। अब सीबीआई जब अपनी तफ्तीश में नोटिस जारी करेगी तो इनके नामों की पुष्टि होगी।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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