जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शामिल नहीं हुए, जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कार्यक्रम में मौजूद थे।
इसके पहले कल 6 सितम्बर को पंजाब सरकार की कैबिनेट ने केंद्र सरकार के जस्टिस मिश्रा को चीफ जस्टिस नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया था। सरकार का आरोप था कि यह फैसला “उसकी सहमति के बिना” लिया गया।
पंजाब सरकार ने मांग की थी कि जब तक उनकी राय न ले ली जाए, तब तक जस्टिस मिश्रा को शपथ न दिलाई जाए। राष्ट्रपति ने कल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर जस्टिस मिश्रा की चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी।
जस्टिस मिश्रा ने 8 मई, 1993 को वकील के तौर पर एनरोलमेंट कराया और 2013 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। उन्होंने 3 फरवरी, 2014 को एडिशनल जज और 1 फरवरी, 2016 को इलाहाबाद में परमानेंट जज के तौर पर शपथ ली। बाद में, उनका ट्रांसफर चंडीगढ़ स्थित पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया, जहां उन्होंने 21 जुलाई, 2025 को कार्यभार संभाला।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में तबादला हुआ था। जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट होने के बाद, वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस थे।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को जस्टिस मिश्रा को प्रमोट करने की सिफ़ारिश की थी। केंद्र सरकार ने शनिवार रात इस सिफ़ारिश को मंज़ूरी दी और जस्टिस मिश्रा की चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति की सूचना जारी की।
पंजाब सरकार ने एक बयान में आरोप लगाया कि कानून मंत्री ने राज्य की राय का इंतज़ार किए बिना जल्दबाज़ी में उनकी नियुक्ति का नोटिफ़िकेशन जारी कर दिया। बयान में आगे कहा गया, “इससे भेदभाव की भावना और मज़बूत होती है कि जब पंजाब राज्य के किसी जज के मामले पर विचार किया जाता है, तो उसे अलग तरह से देखा जाता है, जबकि किसी दूसरे हाई कोर्ट के जज को पंजाब राज्य में नियुक्त करने के मामले में अलग रवैया अपनाया जाता है।”
सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया का उदाहरण दिया, जिन्हें 2024 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ़ जस्टिस नियुक्त करने की सिफ़ारिश की गई थी। लेकिन मध्य प्रदेश राज्य सरकार से सिफ़ारिश न मिलने के कारण लॉ एंड जस्टिस मिनिस्ट्री ने दो महीने से ज़्यादा समय तक इस प्रस्ताव का नोटिफ़िकेशन जारी नहीं किया। बाद में, जस्टिस संधावालिया को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में नियुक्त कर दिया गया। पंजाब सरकार का कहना था कि इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ भेदभाव कर रही है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘X’ पर कहा कि केंद्र सरकार लगातार पंजाब के अधिकारों पर हमला कर रही है।
“आज पंजाब कैबिनेट ने केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों और संवैधानिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वसम्मति से एक अहम प्रस्ताव पारित किया। राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति करना, तय प्रक्रियाओं (मेमोरेंडम ऑफ़ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों का सीधा उल्लंघन है।”
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)