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Friday, September 17, 2021

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Chief Justice

संकट काल में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई न्यायपालिका

जिस तरह से मद्रास हाई कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग पर की गई तल्ख टिप्पणियों को मीडिया में स्थान मिला है और जनता के एक बड़े वर्ग द्वारा इनका स्वागत किया गया है इससे यह स्पष्ट होता है कि आम...

देश के न्यायिक इतिहास में कई बदतर मिसालें दर्ज कर गए जस्टिस बोबडे

भारत के 47वें प्रधान न्यायाधीश पद से शरद अरविंद बोबडे सेवानिवृत्त हो गए हैं। 23 अप्रैल को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था। करीब 17 महीने पहले जब उन्होंने प्रधान न्यायाधीश का पदभार संभाला था, उस वक्त देश की...

सरकार को अप्रिय स्थिति से उबारने की कोशिश में विदाई के दिन भी आलोचना का शिकार हुए चीफ जस्टिस बोबडे

भारत के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के कार्यकाल का आखिरी दिन 23 अप्रैल 2021 भी विवादित रहा। कार्यकाल के अंतिम दिन कोविड से संबंधित विभिन्न हाई कोर्ट में लंबित मामलों को स्वत: संज्ञान के नाम पर उच्चतम न्यायालय...

न्यायपालिका में वैदिक आरक्षण कब तक

अभी तक उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम से होती आ रही है। यह कॉलेजियम सिस्टम क्या है? कॉलेजियम सिस्टम वह पद्धति है जिसमें कुछ वरिष्ठ जज मिलकर खुद जजों की नियुक्ति करते हैं।...

अदालत की अवमानना की गाईडलाइंस क्यों नहीं बनाती सुप्रीम कोर्ट!

आजकल न्यायपालिका के फैसलों और न्यायाधीशों की कड़ी आलोचना सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर हो रही है। इनमें सामान्य जन के साथ विशिष्ट जन भी शामिल हैं। किसी को अनदेखा कर दिया जा रहा है तो किसी पर...

आईटी सेल चलाने वाली बीजेपी के कानून मंत्री ने कहा- अदालती फैसलों की ट्रोलिंग बर्दाश्त नहीं

केंद्र सरकार के कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने पटना हाई कोर्ट के शताब्दी समारोह कार्यक्रम में कहा है कि कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जजों के खिलाफ किसी भी...

सुप्रीम कोर्ट में जजों के चार पद खाली, अगस्त तक छह और जज हो जाएंगे रिटायर

देश की सबसे बड़ी अदालत उच्चतम न्यायालय में आने वाले समय में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। फिलवक्त उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों के चार पद खाली हैं और इन्हें भरने के लिए उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम ने अभी...

सुप्रीम कोर्ट में उठा यूपी की संवैधानिक मशीनरी फेल होने का मामला

उत्तर प्रदेश में सरकार और सरकारी मशीनरी लंबे समय से गैरकानूनी, मनमाने, सनकपन और अनुचित तरीके से कार्य कर रही है, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है और अपने अधिकार का लगातार दुरुपयोग कर रही...

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर बार-बार उठते सवाल

क्या न्याय इतना व्यक्तिनिष्ठ और इतना असहाय हो सकता है कि उसकी समीक्षा और आलोचना करना अनिवार्य बन जाए?  कोई एक न्यायाधीश यदि कमजोर मनुष्य सिद्ध हो जाए तो क्या करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाले उसके फैसलों को...

जस्टिस काटजू का आरोप- सीजेआई अपनी बेंच में किसी और जज को बोलने ही नहीं देते!

क्या जिस पीठ में भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) एसए बोबडे होते हैं, वे पीठ में शामिल किसी अन्य न्यायाधीश को बोलने ही नहीं देते? यह सनसनीखेज आरोप उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और प्रेस काउन्सिल ऑफ़ इंडिया के...
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यूपी में बीजेपी ने शुरू कर दिया सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खेल

जैसे जैसे चुनावी दिन नज़दीक आ रहे हैं भाजपा अपने असली रंग में आती जा रही है। विकास के...
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