Tuesday, October 26, 2021

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सुभाष गाताडे

हे राम/राज्य/! क्या कोविड 19 का अंतराल अध्यापकों के लिए नया अंधेरा लेकर आया है?

In Every Village the Torch, a teacher and an extinguisher the Priest-Victor Hugo महान फ्रेंच लेखक एवं कार्यकर्ता विक्टर हयूगो, ने पिछड़े समाजों में शिक्षा की अहमियत को लेकर बेहद मौजूं बात कही थी। ‘हर गांव में एक दिया, एक...

स्मृति: मानवाधिकार की लड़ाई की कीमत जिंदगी देकर चुकाई थी एडवोकेट शाहिद आज़मी ने

ऐसा वक्त़ आता है जब खामोशी गद्दारी बन जाती है... इतिहास इस बात को दर्ज करेगा कि सामाजिक संक्रमण के इस दौर में सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं थी कि बुरे लोगों की आवाज़ बुलंद थी, बल्कि यह कि...

जनतंत्र के लिए सबसे बड़ी महामारी साबित हुआ कोविड

विश्व प्रसिद्ध रचना ‘रॉबिन्सन क्रूसो’ के लेखक डैनियल डेफो, (1660-1731) बहुआयामी किस्म के व्यक्ति थे, व्यापारी थे, पत्रकार थे, लेखक थे, पर्चे भी लिखते थे। लंदन के निवासी रहे डैफो ने उनके जमाने में आए प्लेग की महामारी, जिसमें...

फैसल की गिरफ्तारीः आखिर क्यों गायब है योगी की डिक्शनरी से प्रेम और सद्भाव शब्द?

कैसे कैसे मंज़र सामने आने लगे हैंगाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैंअब तो इस तालाब का पानी बदल दोयहां के फूल अब कुम्हलाने लगे हैं-दुष्यंत कुमार सत्तर के दशक के मध्य में गुजर गए जानेमाने कवि और गज़लकार दुष्यंत की...

किताबें मत जलाइए, ऐसा इंतज़ाम कीजिए कि लोग उन्हें पढ़ ही न पाएं!

‘आप भले मेरी किताबें और यूरोप के सबसे उन्नत मस्तिष्कों की किताबें जला देंगे, लेकिन उन विचारों का क्या जो उन किताबों में समाई थीं और जो करोड़ों रास्तों से आगे बढ़ चुका है और बढ़ता ही रहेगा।’’-हेलेन केलर,...

क्या बेगुनाहों को यूं ही चुपचाप ‘दफ्न’ हो जाना होगा!

‘‘कोई न कोई जरूर जोसेफ के बारे में झूठी सूचनाएं दे रहा होगा, वह जानता था कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है, लेकिन एक अलसुबह उसे गिरफ्तार किया गया।”(‘Someone must have been telling lies about Joseph K,...

क्या फेसबुक ग्रस्त हो गया है भारत का जनतंत्र?

एवगेनी मोरोजोव (जन्म 1984), बेलारूस में जन्मे अमेरिकी लेखक, क्या यह नाम परिचित दिखता है? शायद नहीं! यह विद्वान जो टेक्नोलोजी के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करते हैं वह उन शुरुआती साइबर सन्देहवादियों में शुमार किए जाते हैं, जिन्होंने...

हिन्दुस्तान में कार्पोरेट सोशल मीडिया : नफरत बेचो, मुनाफा कमाओ

"कुछ वाकई में मनोरोगी जैसे दिख रहे थे। लोगों का बहुलांश चिथड़े लपेटे और निरक्षर किसानों का था, जो तुत्सी के प्रति नफरत की भावना से आसानी से उन्माद में आ सकते थे। मैं जिनसे मिला उनमें शायद सबसे...

कैसा होना चाहिए हमारे दौर का नायक?

घेरेबन्दी में पड़े अपने शहर के हालात को लेकर अपने जमाने का शायर कैसी प्रतिक्रिया देता है? अचानक इस बारे में कुछ कहना मुश्किल जान पड़ सकता है, अलबत्ता एक तरीका है फिलिस्तीन के महान कवि महमूद दरवेश के...

केन्द्रीय विश्वविद्यालय: वर्चस्वशाली जातियों के नए ठिकाने ?

क्या हम कभी जान सकेंगे कि मुल्क के चालीस केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में नियुक्त उपकुलपतियों के श्रेणीबद्ध वितरण- अर्थात वह किन सामाजिक श्रेणियों से ताल्लुक रखते हैं -के बारे में? शायद कभी नहीं ! विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के केन्द्रीय विश्वविद्यालय...

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हाल-ए-यूपी: बढ़ती अराजकता, मनमानी करती पुलिस और रसूख के आगे पानी भरता प्रशासन!

भाजपा उनके नेताओं, प्रवक्ताओं और कुछ मीडिया संस्थानों ने योगी आदित्यनाथ की अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त फैसले...