देवरस के इर्द–गिर्द चयनात्मक विस्मृति (Selective Amnesia) को समझना भागवत द्वारा गोलवलकर को हटाया जाना समझा जा… Read More
सुभाष गाताडे
‘भविष्य का भारत’ अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में पहले… Read More
एक बिल्ली आँखें बंद करके दूध पीती है और सोचती है कि दुनिया उसे देख नहीं रही… Read More
हमारे युग का नायक , मित्रों, एक पोर्ट्रेट है, लेकिन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हमारी… Read More
(जनवादी लेखक संघ, दिल्ली के 10 वें राज्य सम्मेलन (4 अप्रैल 2026) में प्रस्तुत वक्तव्य का संशोधित… Read More
धर्मान्ध लोग – जो हंसना भूल गए हैं, रोना भूल गए हैं, और करूणा भूल गए हैं… Read More
हम को मालूम है जन्नत की हकीक़त लेकिन दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा… Read More
‘मौन रहना मतलब सहमति देना’ – लातिन कहावत ‘ऐसा वक्त़ आ सकता है कि हम नाइंसाफी को… Read More
यह वर्ष 1763 की बात है, जब जेनेवा की धार्मिक सभा ने रॉबर्ट कोवेल नामक व्यक्ति को… Read More
कुछ ख़बरें मन को अचानक उदास कर जाती हैं… आप को अंदाज़ा होता है कि अपने किसी… Read More