हमारे युग का नायक , मित्रों, एक पोर्ट्रेट है, लेकिन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हमारी… Read More
सुभाष गाताडे
(जनवादी लेखक संघ, दिल्ली के 10 वें राज्य सम्मेलन (4 अप्रैल 2026) में प्रस्तुत वक्तव्य का संशोधित… Read More
धर्मान्ध लोग – जो हंसना भूल गए हैं, रोना भूल गए हैं, और करूणा भूल गए हैं… Read More
हम को मालूम है जन्नत की हकीक़त लेकिन दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा… Read More
‘मौन रहना मतलब सहमति देना’ – लातिन कहावत ‘ऐसा वक्त़ आ सकता है कि हम नाइंसाफी को… Read More
यह वर्ष 1763 की बात है, जब जेनेवा की धार्मिक सभा ने रॉबर्ट कोवेल नामक व्यक्ति को… Read More
कुछ ख़बरें मन को अचानक उदास कर जाती हैं… आप को अंदाज़ा होता है कि अपने किसी… Read More
स्वाधीन भारत, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार [Universal Adult Franchise] के रास्ते पर चलेगा। बीसवीं सदी की पांचवीं दहाई… Read More
“though this be madness, yet there is method in it”? -Polonious, in ‘Hamlett’ by Shakespeare असम के… Read More
‘मैंने जापान में जनता को अपनी स्वतंत्रता की सीमाएं अपनी सरकार द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार करते हुए… Read More