उपेंद्र चौधरी

कोविड-19 भी पूंजीवाद से पैदा होने वाला एक संकट

जितने लोग दूसरे विश्वयुद्ध में मारे गये थे, उससे कहीं ज़्यादा लोग ‘तीसरे विश्वयुद्ध’ में मारे गये। यह तीसरा विश्वयुद्ध…

3 months ago

मर्दवादी सियासत का चक्रव्यूह तोड़ती एक राजनेता

अपने पूरे वजूद के साथ कभी वह कांग्रेस में थी। अपने वजूद के लिए सदा सचेत रही उनकी जवानी का…

5 months ago

प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर विशेष: नागरिक समाज की पक्षधरता ही मीडिया के निष्पक्षता की है कसौटी

दुनिया के दूसरे समुदायों की तरह हिन्दू और मुसलमान समुदायों के बीच यूं तो ऐसे कई शैलीगत फ़र्क़ है, जिनसे…

1 year ago

जयंती पर विशेष: तत्वदर्शी संत रविदास, यानी एक समाज वैज्ञानिक रविदास

मनुष्य जब गहरी चिंतन-प्रक्रिया से गुज़रते हुए चेतना के साथ उच्चतर होता जाता है, तब उसकी आत्मा, उस परम सत्य…

1 year ago

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है!

कला मनुष्य को एक ऐसी दुनिया से साक्षात्कार कराती है,जिसमें वह सबकुछ दिखता है,जो अमूमन दिखायी पड़ने वाली दुनिया में…

2 years ago

जिसकी धुन में राग-रागिनी ही नहीं हिस्ट्री-ज्योग्राफ़ी भी

राग-रागिनी के नोट्स बनाना और उसे रियाज़ के ज़रिये अपने मौसिक़ी में उतार लेना एक बात है, मगर राग-रागिनी को…

2 years ago