जब नेता सच बोलने लगें और पत्रकार चुप हों आज हालात ऐसे हैं कि प्रशांत किशोर जैसे… Read More
उपेंद्र चौधरी
नेपाल की राजनीति लंबे समय से बाहरी प्रभावों पर टिकी रही है। लोकतंत्र का ढांचा विदेशों से… Read More
कभी भारतीय मुसलमानों को सिर्फ़ वोट बैंक समझा जाता था। चुनाव आने पर नेता आते, बाबरी मस्जिद… Read More
भारतीय परंपरा और पश्चिमी दर्शन दोनों ही यह मानते हैं कि “गुरु” केवल शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन… Read More
भारत के समकालीन छात्र आंदोलनों की स्मृति में जेएनयू के तीन नाम हमेशा लिए जाते हैं। ये… Read More
झारखंड की एक संथाली बस्ती की रात थी। टिमटिमाती लालटेन के नीचे एक बूढ़ी औरत चुपचाप बैठी… Read More
जिस समय प्रेमचंद ने लिखना शुरू किया, वह भारत के इतिहास का एक संक्रमणकाल था। एक ओर… Read More
हिंदी सिनेमा कभी भारतीय जनमानस का गहरा आईना हुआ करता था, अब धीरे-धीरे एक ऐसी फैक्ट्री बनता… Read More
भारतीय समाज की जातीय संरचना एक जीवंत सामाजिक प्रयोगशाला रही है, जहां राजनीतिक चेतना, सामाजिक आंदोलन और… Read More
जिस देश की नींव “ला इलाह इल्लल्लाह” जैसे मज़बूत धार्मिक नारे पर रखी गई थी, आज वही… Read More