जब धर्म के नाम पर अंधविश्वास, कट्टरता और हिंसा दुनिया को जकड़ रही हो, ऐसे समय में… Read More
उपेंद्र चौधरी
ईश्वर- यह शब्द जितना सरल प्रतीत होता है, उतना ही गूढ़ और बहुआयामी भी है। यदि हम… Read More
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब विश्व व्यवस्था का पुनर्निर्माण हो रहा था, तब अमेरिकी सीनेटर जे.… Read More
भारत में जब भी किसी कुख्यात अपराधी का एनकाउंटर होता है, तो जनता के बीच दो तरह… Read More
इतिहास में बदलाव सिर्फ किसी कलाकार की कृतियों से नहीं आता, बल्कि वह इस बात से भी… Read More
जब एक पिता अपनी ही बेटी को गोली मार देता है, क्योंकि वह अपनी एक स्वतंत्र पहचान… Read More
पटना में व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या, पूर्णिया में हुआ नरसंहार और सिवान में हुई सामूहिक हत्याएं… Read More
भाषा की कोपलें किसी आदेश या दबाव से नहीं फूटतीं, वह मनुष्य के विचार, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक… Read More
जब दुनिया के अधिकांश धर्म और सभ्यताएं अपने विशेष पर्वों को उल्लास और उत्सव के रूप में… Read More
राजनीतिक विमर्श में भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि एक वैचारिक हथियार भी होती है। शब्दों… Read More