उत्तराखंड के हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर उत्तराखंड के हलद्वानी में दर्ज मामले में नया मोड़ आया है। राहुल पर मुकदमा दर्ज कराने वाले अमित कुमार के खिलाफ वाल्मीकि समाज थाने पहुंच गया है।
हल्द्वानी कोतवाली में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी गई है। शिकायत में राहुल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने वाले अमित की उपजाति पर सवाल उठाए गए हैं। लिखित शिकायत में कहा गया है कि राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले अमित कुमार का वाल्मीकि समाज से लेना-देना नहीं है।
शिकायत में वाल्मिकी समाज के लोगों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही कहा है कि अमित एससी समाज का नाम लेकर बदनाम कर रहे हैं। पुलिस से अमित की वास्तविक पहचान का पता लगाने के लिए भी कहा गया है।
वाल्मीकि समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने हल्द्वानी के स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपी। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शिकायत में कहा गया है कि राहुल गांधी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर कराने वाले व्यक्ति का असली नाम अमित कुमार है, जबकि उसने खुद को ‘अमित वाल्मीकि’ बताकर शिकायत दर्ज कराई है। समाज के लोगों का कहना है कि अमित कुमार का वाल्मीकि समुदाय से कोई संबंध नहीं है और उसने राजनीतिक मक़सद से समुदाय के नाम का इस्तेमाल किया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अमित कुमार भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय नेता का रिश्तेदार है। इकोनॉमिक टाइम्स ने एएनआई के हवाले से रिपोर्ट दी है कि वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि अमित कुमार पहले भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर नगर निकाय चुनाव भी लड़ चुका है। हालाँकि, इन आरोपों की अभी तक पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
वाल्मीकि समाज ने पुलिस से मांग की है कि यह जाँच की जाए कि शिकायतकर्ता का वास्तविक नाम क्या है और क्या वह वास्तव में वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखता है।
वाल्मीकि समाज ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के दौरान झूठी पहचान या फर्जी नाम का इस्तेमाल किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार हल्द्वानी के सिटी एसपी मनोज कुमार कत्याल ने कहा कि मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि जाँच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने 30 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर दिए गए बयान से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त की सभा के बाद एक दक्षिणपंथी समूह ने कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया था। ‘शुद्धीकरण’ श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास जैसे हिंदू संगठनों ने उसी मंच पर हवन-यज्ञ कर किया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता बताया। खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि उन्हें अछूत मानकर शुद्धिकरण किया गया, जो उनका और देश के हर दलित का अपमान है। उन्होंने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की। राहुल गांधी ने भी इसे छुआछूत करार दिया और एफआईआर की मांग की।
हालाँकि, कार्यक्रम के आयोजकों ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि शुद्धिकरण अनुष्ठान का जाति या किसी समुदाय से कोई संबंध नहीं था।
इस बीच, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को देहरादून में परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकाला और हल्द्वानी रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण अनुष्ठान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
(जनचौक ब्यूरो)