उत्तराखंड की जेलों में क्षमता से दोगुने कैदी बंद, पांच जिलों में नहीं है कारागार

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देहरादून। पहाड़ों में अपराध दर कम होने के कारण आम तौर पर उत्तराखंड को शान्त प्रदेश का दर्जा दिया जाता है। यहां तक कि राज्य के पर्वतीय जनपदों में अपराध की रोकथाम के लिए रेगुलर पुलिस की भी कोई जरूरत महसूस नहीं की गई। छिटपुट लड़ाई झगड़ों और विवादों से निबटने के लिए राजस्व विभाग के पटवारियों को ही जिम्मेदारी देकर मान लिया गया था कि इस स्तर के विवाद उनके ही स्तर पर सुलझ जायेंगे। पर्वतीय क्षेत्र के मुख्य मार्गों को छोड़ दिया जाए तो सुदूर गांवों में अभी हाल तक यही पटवारी पुलिस वाली व्यवस्था लागू थी।

पिछले साल प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले अंकिता भण्डारी हत्याकांड के बाद बदली परिस्थितियों में पहाड़ के कुछ हिस्सों में बेशक नए थाने खोले गए हों। लेकिन अधिकांश हिस्सा अब भी पुरानी पटवारी व्यवस्था के ही अधीन है। अपराध दर कम होने का ही नतीजा है कि राज्य के हर जिले में जेल को कभी जरूरी नहीं समझा गया।

पांच पर्वतीय जिलों में आज भी कोई जेल नहीं है। प्रदेश में वर्तमान में ग्यारह जेल अस्तित्व में हैं। जबकि पिथौरागढ़ जेल का निर्माण चल रहा है। ग्यारह में से सात जेलों को जिला कारागार, दो जेलों को उप कारागार, एक जेल को सेंट्रल जेल तथा एक जेल को खुली जेल (शिविर) का दर्जा प्राप्त है। अभी प्रदेश के आठ जनपदों में ही जेल हैं। नैनीताल, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिले में दो दो जेल हैं। लेकिन राज्य के रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर, चम्पावत जिलों में कोई जेल नहीं है। जबकि पिथौरागढ़ में जेल का निर्माण निर्माणाधीन है।

लेकिन अपराध दर कम होने के बाद भी राज्य की सामान्य जेलों में बंद कैदियों की हालत देश के दूसरे राज्यों जितनी ही बुरी है। प्रदेश की नौ जेलों में उनकी क्षमता 3,272 कैदियों से करीब दोगुने से भी अधिक 6,744 कैदी भरे पड़े हैं। जिसमें 2,056 सिद्ध दोष (सजायाफ्ता) बंदी तथा 4,688 विचाराधीन कैदी शामिल है। अलबत्ता इसके अतिरिक्त राज्य की इकलौती 300 कैदियों की क्षमता वाली सम्पूर्णानन्द शिविर सितारगंज (खुली जेल) में 34 सजायाफ्ता कैदी बंद हैं। इस जेल में विचाराधीन कैदियों को नहीं रखा जाता। जबकि चमोली जेल में 169 कैदियों की क्षमता के बरक्स 140 कैदी हैं। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत कारागार मुख्यालय द्वारा नदीमउद्दीन को उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ है।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीमउद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार (कारागार मुख्यालय) से राज्य की जेलो में बंदियों की क्षमता तथा वर्तमान में बंद कैदियों की संख्या के सम्बन्ध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में कारागार मुख्यालय ने जेलों की क्षमता तथा बंदियों का यह विवरण उपलब्ध कराया है। इस सूचना के अनुसार सम्पूर्णानन्द शिविर जेल सितारगंज (खुली जेल) तथा चमोली जिला कारागार के अलावा राज्य की सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं।

उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार क्षमता से सर्वाधिक अधिक (364 प्रतिशत कैदी) 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में (371 कैदी) हैं। इसमें 273 विचाराधीन तथा 98 सजायाफ्ता कैदी बंद हैं। दूसरे स्थान पर क्षमता के (335 प्रतिशत कैदी) 535 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी (1792 कैदी) है। इसमें 1610 विचाराधीन तथा 182 सजायाफ्ता कैदी है।

तीसरे स्थान पर क्षमता के (286 प्रतिशत कैदी) 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में 203 कैदी बंद है। इसमें 189 विचाराधीन 14 सजायाफ्ता शामिल हैं। चौथे स्थान पर क्षमता के (252 प्रतिशत कैदी) 580 क्षमता वाली जिला कारागार देहरादून में 1463 कैदी बंद हैं। इसमें 1073 विचाराधीन तथा 390 सजायाफ्ता शामिल है। पांचवें स्थान पर क्षमता के (241 प्रतिशत कैदी) 244 क्षमता वाली रूड़की उपकारागार में 588 कैदी बंद हैं। यहां 558 विचाराधीन तथा 30 सजायाफ्ता शामिल हैं।

छठे नंबर पर क्षमता के (157 प्रतिशत कैदी) 150 क्षमता वाली जिला कारागार टिहरी में 236 कैदी बंद हैं। यहां कैदियों की संख्या 168 विचाराधीन तथा 68 सजायाफ्ता है। सातवें स्थान पर क्षमता के (145 प्रतिशत कैदी) 888 क्षमता वाली जिला कारागार हरिद्वार में 1291 कैदी बंद हैं। इस संख्या में 672 विचाराधीन तथा 619 सजायाफ्ता शामिल हैं। आठवें स्थान पर क्षमता के (126 प्रतिशत कैदी) 150 क्षमता वाली जिला कारागार पौड़ी में 189 कैदी बंद हैं। जिसमें 131 विचाराधीन 58 सजायाफ्ता शामिल है। नवें स्थान पर क्षमता के 111 प्रतिशत कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज में 611 कैदी बंद हैं। इसमें 14 विचाराधीन तथा 597 सजायाफ्ता कैदी बंद हैं।

उपलब्ध सूचना के अनुसार प्रदेश में केवल दो जेल ही ऐसी है जिसमें निर्धारित स्वीकृत क्षमता से कम कैदी बंद है। इसमें एक विशेष जेल सम्पूर्णानन्द शिविर (खुली जेल) सितारगंज है जिसमें केवल सजायाफ्ता कैदियों को ही रखा जाता है। इस जेल की क्षमता 300 कैदियों की है जबकि इसकी क्षमता के मात्र 11 प्रतिशत 34 सजायाफ्ता कैदी ही इसमें बंद है। इसके अतिरिक्त सामान्य जेलों में स्वीकृत क्षमता से कम कैदियों वाली एकमात्र जेल जिला कारागार चमोली है। इसमें उसकी क्षमता 169 की अपेक्षा 83 प्रतिशत 140 कैदी ही बंद हैं इसमें 85 विचाराधीन तथा 55 सजायाफ्ता कैदी शामिल है।

(सलीम मलिक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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