‘वोट चोरी’ पर मोदी-शाह की जांच होगी, ज्ञानेश कुमार सरकारी गवाह बन जाएँ: राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि ‘वोट चोरी’ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ जाँच होगी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के ‘मनमाने’ फ़ैसलों के ख़िलाफ़ आपत्ति जताने वाले दोनों आयुक्तों की तारीफ़ करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार अब अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बन जाएँ। राहुल ने कहा, ‘वोट ही चोरी हो गया है तो वोट चोरी के ज़रिए संसद में पहुंचे कानून बनाने वालों ने जो भी कानून बनाए हैं, वे भी गैर-कानूनी हैं।’

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर वोट की प्रक्रिया ही प्रभावित होती है तो इसका असर संविधान, क़ानून बनाने की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ता है।

राहुल गांधी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद हुई है जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध SIR, मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से था।

राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से सवाल उठाया जाना महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्तों ने जिन मुद्दों पर आपत्ति जताई, उन पर पहले भी सवाल उठाए गए थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया।

राहुल ने कहा कि उनके अनुसार यह कोई सामान्य चुनावी गड़बड़ी का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में ‘वोट चोरी’, ‘कानून चोरी’ और ‘संस्था चोरी’ की एक कड़ी बताई। उन्होंने कहा कि वोट लोकतंत्र की बुनियाद है। वोट के जरिए संसद बनती है, संसद से कानून बनते हैं और कानूनों के आधार पर संस्थाएं काम करती हैं। उनका तर्क था कि अगर किसी सांसद का चुनाव ही कथित तौर पर चोरी किए गए वोट के आधार पर हुआ है तो उसके द्वारा बनाए गए कानून और किए गए संस्थागत बदलावों की वैधता पर भी सवाल उठता है।

राहुल गांधी ने कहा, ‘वोट चोरी से कानून चोरी और कानून चोरी से संस्था चोरी होती है।’ उन्होंने दावा किया कि अगर वोट की प्रक्रिया ही प्रभावित हो गई तो संविधान अपनी शक्ति खो देता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी इसका असर पड़ता है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता के वोट की रक्षा करना है। उनके मुताबिक, वोट केवल किसी उम्मीदवार को चुनने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की लोकतांत्रिक भागीदारी का आधार है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का भी नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित चुनावी गड़बड़ियों के पीछे शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जांच होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों कथित साजिश के शीर्ष पर हैं और कहा कि इस मामले में चुप नहीं बैठा जा सकता।

राहुल गांधी ने कहा दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में एंटी-इनकंबेंसी गायब नहीं होती, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर यह कैसे गायब हो जाती है? राहुल गांधी ने कहा, ‘सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में नहीं होती। इस धरती पर कोई भी लोकतंत्र ऐसा नहीं है जहां एंटी-इनकंबेंसी न हो। यह हमारे लिए एक पहेली बन गई है।’ उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के नेताओं और क्षेत्रीय पार्टियों पर बार-बार एंटी-इनकंबेंसी असर करती है, लेकिन नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा पर यह कभी असर नहीं करती।

राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ‘हरियाणा 50 साल से एक पार्टी से दूसरी पार्टी में बदलता रहा। अचानक एंटी-इनकंबेंसी गायब हो गई। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश में कभी समाजवादी पार्टी तो कभी बसपा की सरकार बनती थी, अब वह लहर गायब हो गई। मध्य प्रदेश और गुजरात में भी यही हाल है।’ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा, ‘इंदिरा गांधी बांग्लादेश युद्ध जीतकर लोकप्रियता के चरम पर थीं। फिर एक-दो साल में ही भारी एंटी-इनकंबेंसी और दबाव आ गया।’

राहुल ने कहा, “नरेंद्र मोदी, अमित शाह कहते हैं- आने वाले कई साल तक देश में बीजेपी की सरकार रहेगी। मैं करीब 50 साल से राजनीति देख रहा हूं, लेकिन कोई भी नेता ऐसी बातें नहीं कह सकता। इंदिरा गांधी जी ने बांग्लादेश का युद्ध जीता, उसके बावजूद अगले कुछ साल में एंटी-इनकंबेंसी हो गई। देश के कई प्रधानमंत्रियों-मुख्यमंत्रियों को इसका सामना करना पड़ा। एंटी-इनकंबेंसी हिंदुस्तान की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। लेकिन ये ताकत नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर असर क्यों नहीं करती- इसका जवाब दो इलेक्शन कमिश्नर्स ने दे दिया है।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कई प्रमुख लोगों की तस्वीरें भी दिखाईं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत अन्य लोगों की तस्वीरें थीं। राहुल गांधी ने इन लोगों को कथित चुनावी और संस्थागत घटनाक्रम से जोड़ते हुए ‘साजिशकर्ता’ बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में दो आयुक्तों की ओर से ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर सवाल उठाए जाने को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास यह कहने के लिए पर्याप्त जानकारी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विभिन्न विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ हुईं। उन्होंने कहा कि वह इसे केवल राजनीतिक आरोप के रूप में नहीं उठा रहे हैं और उनके पास इसके समर्थन में सबूत हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में चुनाव, कानून बनाने की प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो उसका असर केवल चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोकतंत्र के पूरे संस्थागत ढांचे पर पड़ता है।

राहुल गांधी ने कहा कि ‘वोट देश की नींव है’ और वोट की शक्ति से ही संविधान को ताकत मिलती है। उनके अनुसार संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों के आधार पर संस्थाएं काम करती हैं। इसलिए मतदाता के अधिकारों से जुड़ा कोई भी विवाद व्यापक संवैधानिक सवाल बन जाता है।

(जनचौक ब्यूरो)

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