Saturday, January 22, 2022

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चारधाम देवस्थानम बोर्ड को भंग करने और बोर्ड अधिनियम को निरस्त करने का एलान

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यह अपने फैसले पलटने का समय है। यह अपने ही बनाये क़ानूनों को निरस्त करने का समय है। यह चुनाव का समय है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नक्श-ए-क़दम पर चलते हुये उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड को भंग करने और बोर्ड अधिनियम को निरस्त करने का एलान किया है। इस बोर्ड का लंबे समय से विरोध हो रहा था और तीर्थ-पुरोहित इसे भंग करने की मांग पर आंदोलन कर रहे थे।

बता दें कि 19 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने जब तीनों कृषि कानूनों की वापसी का एलान किया था तो उसके बाद उत्तराखंड सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत ने भी कहा था कि जिस तरह कृषि कानूनों पर प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाया है, उसी तरह प्रदेश सरकार भी देवस्थानम बोर्ड को लेकर अडिग नहीं हैं। अगर ये लगेगा कि ये बोर्ड चारधाम, मठ-मंदिरों और आमजनों के हित में नहीं है तो सरकार इसे वापस लेने पर विचार कर सकती है।

माना जाता है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी साधु-संतों की नाराज़गी की वजह से ही चली गई थी। आगामी विधानसभा चुनाव में संभावित नुकसान और तीर्थ पुरोहितों की नाराज़गी के चलते ये फैसला लिया गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ यात्रा का विरोध किया गया था। गौरतलब है कि दो साल पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया गया था। तीर्थ पुरोहितों के लगातार विरोध और कांग्रेस द्वारा इसे चुनावी मुद्दा बनाने से सत्ताधारी बीजेपी दबाव में थी।

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर वापस लिया अधिनियम

चारधाम देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का एलान करते हुये मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मामले में उच्च स्तरीय रिपोर्ट पर विचार करते हुए उन्होंने अधिनियम वापस लेने का फैसला लिया है। उन्होंने देवस्थानम बोर्ड को भंग कर दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगे कहा कि – “पिछले दिनों देवस्थानम बोर्ड को लेकर विभिन्न प्रकार के सामाजिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों, पंडा समाज के लोगों और विभिन्न प्रकार के जनप्रतिनिधियों से बात की है और सभी के सुझाव आये हैं।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि -” मनोहर कांत ध्यानी जी ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई थी। उस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट दी है। जिस पर हमने विचार करते हुए निर्णय लिया है कि हम इस अधिनियम को वापस ले रहे हैं। आगे चल कर हम सभी से बात करते जो भी उत्तराखंड राज्य के हित में होगा उस पर कार्रवाई करेंगे।’

गौरतलब है कि उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने सोमवार को चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर मंत्रिमंडल की उपसमिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है। उससे एक दिन पहले ही उच्चाधिकार समिति ने इसी विषय पर अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी थी। उच्चाधिकार समिति को उत्तराखंड चार धाम प्रबंधन अधिनियम , 2019 पर गौर करने के लिए राज्य सरकार ने गठित किया था।

गौरतलब है कि तीर्थ पुरोहितों की नाराज़गी और आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मनोहर कांत ध्यानी के अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई थी।
तब तीर्थ पुरोहितों से मनोहर कांत ध्यानी ने कहा था कि बोर्ड को किसी कीमत पर भंग नहीं किया जाएगा। अगर पुरोहित समाज को इसके प्रावधानों से दिक्कत है तो उस पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में तीर्थ-पुरोहितों का गुस्सा और भी बढ़ गया और उन्होंने विरोध तेज कर दिया।

नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे का किया गया विरोध

देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ-पुरोहितों ने नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे का विरोध किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे से ठीक पहले देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहितों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया था। तब गंगोत्री में आंदोलन तेज करते हुए साधु-संतों ने बाज़ार बंद किये और रैलियां निकालीं। मोदी के केदारनाथ पहुंचने पर तीर्थ पुरोहितों के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में अधिनियम और बोर्ड को वापस लेने का आग्रह किया था।

नाराज़ तीर्थ पुरोहितों ने केदारनाथ में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को मंदिर जाने से रोक दिया। राज्य के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का भी तीर्थ पुरोहितों ने काफी देर तक घेराव किया था। चारों हिमालयी धामों-बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहित लगातार देवस्थानम बोर्ड का विरोध कर रहे थे। पुरोहितों का मानना है कि बोर्ड का गठन उनके अधिकारों का हनन है।

त्रिवेंद्र रावत सरकार ने पारित किया था अधिनियम

देवस्थानम अधिनियम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के कार्यकाल में पारित हुआ था। इसके तहत चार धामों सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के प्रबंधन के लिए बोर्ड का गठन किया गया था। तब श्राइन बोर्ड की तर्ज पर त्रिवेंद्र सरकार ने देवस्थानम बोर्ड बनाने का फैसला किया था।

इसके बाद 27 नवंबर 2019 को त्रिवेंद्र सरकार ने कैबिनेट से उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम-2019 बोर्ड को मंजूरी दी। 5 दिसंबर 2019 में विधानसभा से विधेयक को पास भी सरकार ने करा लिया। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम-2019 बोर्ड को 14 जनवरी 2020 को राजभवन ने मंजूरी मिल गई। इसके बाद सरकार ने 24 फरवरी 2020 को देवस्थानम बोर्ड का सीईओ नियुक्त कर दिया। इस तरह भारी-भरकम बोर्ड का गठन कर चार धामों के अलावा 51 मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया। उत्तराखंड में केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ चार धाम हैं। इन चारों धामों का नियंत्रण भी सरकार के पास आ गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बोर्ड का गठन करते हुये दावा किया था कि देवस्थानम बोर्ड से देश ही नहीं, बल्कि विश्व के तमाम हिंदू आस्थावानों को इसका फायदा होगा। बोर्ड का गठन करते हुये उन्होंने दावा किया था कि इस बोर्ड का सभी मंदिरों के पुरोहित समर्थन कर रहे हैं, बस कुछ लोग ही हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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