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Wednesday, September 29, 2021

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पेगासस प्रोजेक्ट में अब आये नरेश गोयल, अजय सिंह, प्रशांत रुइया और पीएसयू प्रमुखों के नाम

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पेगासस प्रोजेक्ट में रोज ही नये-नये खुलासे हो रहे हैं। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार पेगासस के ज़रिये संभावित निगरानी के दायरे में रिलायंस की दो कंपनियों, अडानी समूह के अधिकारी, गेल इंडिया के पूर्व प्रमुख, म्युचुअल फंड से जुड़े लोगों और एयरसेल के प्रमोटर सी. शिवशंकरन के नंबर भी शामिल थे।

पेगासस प्रोजेक्ट लिस्ट में विभिन्न वर्गों के कई लोग और अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनके फोन नंबर सामने आए हैं। इनमें कुछ व्यवसायी और नौकरशाह भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर इस सर्विलांस लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। द वायर के मुताबिक, इसमें जेट एयरवेज के पूर्व प्रमुख नरेश गोयल, पूर्व शीर्ष पीएसयू अधिकारियों के नाम जैसे गेल इंडिया के पूर्व प्रमुख बी.सी. त्रिपाठी भी शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गोयल के अलावा, सूची में सबसे प्रमुख नाम स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह और एस्सार समूह के प्रशांत रुइया द्वारा उपयोग किए गए नंबर शामिल हैं। सूची में कई व्यवसायी या कंपनियों के अधिकारी भी शामिल हैं, जिनके नाम पिछले कुछ वर्षों में ज्यादातर ऋण धोखाधड़ी की जांच के कारण चर्चा में रहे हैं। इसमें रोटोमैक पेन के विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल, और एयरसेल के पूर्व प्रमोटर और आवारा उद्यमी सी. शिवशंकरन शामिल हैं।

कोठारी और शिवशंकरन की प्रविष्टियां भी जांच के प्रमुख बिंदुओं से मेल खाती हैं जो कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने की हैं। इसके अलावा, अडानी समूह में एक मध्य-स्तरीय अधिकारी, एक व्यक्ति जो एस्सार समूह के साथ काम करता था और दूसरा स्पाइसजेट के साथ पहले काम करता था।

द वायर के अनुसार एक फोन नंबर जिसका इस्तेमाल पूर्व में राज्य द्वारा संचालित गेल इंडिया के प्रमुख बी.सी. त्रिपाठी, जो जनवरी 2020 में गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एस्सार में शामिल हुए, सूची में हैं। निगरानी के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में त्रिपाठी का चयन प्राकृतिक गैस निगम में शीर्ष पद संभालने के एक महीने बाद हुआ है और लगभग एक साल बाद लीक हुए रिकॉर्ड में उनकी संख्या दिखाई देती है।

दो नंबर, एक भारतीय जीवन बीमा निगम के पूर्व बॉस के लिए और दूसरा गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन के पूर्व कार्यकारी निदेशक के लिए भी सूची में दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के कंसोर्टियम, जिसमें द वायर भी शामिल है, के पेगासस प्रोजेक्ट के तहत इसका खुलासा हुआ है।भाजपा के साथ अपने जुड़ाव के लिए जाने जाने वाले अजय सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में एयरलाइन को कलानिधि मारन से वापस लेने के बाद उल्लेखनीय सुधार के साथ आगे बढ़ाया है।

फ्रांस के मीडिया नॉन-प्रॉफिट फॉरबिडेन स्टोरीज ने सबसे पहले 50,000 से अधिक उन नंबरों की सूची प्राप्त की थी, जिनकी इजरायल के एनएसओ ग्रुप द्वारा निर्मित पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी किए जाने की संभावना है। इसमें से कुछ नंबरों की एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फॉरेंसिक जांच की, जिसमें ये पाया गया कि इन पर पेगासस के जरिये हमला किया गया था।फॉरबिडेन स्टोरीज ने इस ‘निगरानी सूची’ को द वायर समेत दुनिया के 16 मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया, जिन्होंने पिछले एक हफ्ते में एक के बाद एक बड़े खुलासे किए हैं। इस पूरी रिपोर्टिंग को ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है।

पिछले कुछ सालों में जेट एयरवेज के बॉस नरेश गोयल के करिअर ने अर्श से फर्श तक का सफर तय किया है। साल 2018 के आखिर में कई मीडिया रिपोर्ट्स ने संकेत किया था कि पैसे की कमी से जूझ रही उनकी एयरलाइन दिवालिया होने की कगार पर है। काफी उठापटक के बाद आखिरकार गोयल और उनकी पत्नी ने मार्च 2019 में बोनर्ड से इस्तीफा दे दिया और एयरलाइन के नेताओं ने प्रबंधन संभाल लिया। गोयल का नंबर पेगासस प्रोजेक्ट की सूची में उस दौरान दिखाई देता है जिस समय उन्हें मई 2019 में मुंबई एयरपोर्ट पर रोका गया था। बाद में जुलाई 2019 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने आधिकारिक तौर पर जेट एयरवेज समूह की कई कंपनियों की जांच का आदेश दिया था। इसके अलावा कोठारी और शिवशंकरन का नंबर उस समय सूची में दर्ज हुआ जब उनके खिलाफ सीबीआई जैसी कानूनी एजेंसियां जांच कर रही थीं।

बड़े कॉरपोरेट घरानों में काम करने वाले कम से कम तीन बिजनेस एक्जीक्यूटिव इस सूची में शामिल हैं। उनके पद अलग-अलग थे, लेकिन वे कंपनी से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर काम करते थे। इनमें अडानी समूह के मिड-लेवल के एक अधिकारी, एस्सार समूह के एक व्यक्ति और स्पाइसजेट के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। द वायर उनके नामों का खुलासा नहीं कर रहा है क्योंकि वे शीर्ष प्रबंधन का हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने नाम न छापने का अनुरोध किया है।

इसके अलावा अपनी कंपनियों से जुड़े विवादों में रहने वाले रिलायंस इंडस्ट्री के वी. बालसुब्रमण्यन और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के एएन सेथुरमन के नंबर भी इस सूची में शामिल हैं। दोनों कर्मचारी एक समय अविभाजित रिलायंस समूह का हिस्सा थे। इन पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत सरकारी दस्तावेज चोरी करने का आरोप लगाया गया था।

लीक हुई सूची में भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग से जुड़े कम से कम पांच कॉरपोरेट अधिकारियों के नंबर दर्ज हैं। इनमें फ्रैंकलिन टेम्पलटन, डीएसपी ब्लैकरॉक और मोतीलाल ओसवाल जैसी कंपनियों के पेशेवर शामिल हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम के पूर्व प्रमुख और गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन के पूर्व कार्यकारी निदेशक के नंबर भी इस सूची में दिखाई देते हैं।

सर्विलांस का निशाना बनाए जाने वाले लोगों की संभावित सूची में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह, का नाम शामिल हैं। राजेश्वर सिंह उत्तर प्रदेश के प्रांतीय पुलिस सेवा अधिकारी (पीपीएस) हैं और वे ईडी के साथ साल 2009 से हैं। इस दौरान वे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले और एयरसेल-मैक्सिस केस जैसे कई संवेदनशील मामलों की जांच में शामिल थे। वे सहारा समूह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच में भी शामिल रहे हैं। लीक डेटाबेस के अनुसार, निगरानी सूची में उनका नंबर साल 2017 की आखिर से साल 2019 के मध्य तक दिखाई देता है। इतना ही नहीं, साल 2018 के आस-पास उनकी पत्नी और उनकी दो बहनें, जिनमें से एक आईएएस अधिकारी से वकील बनीं आभा सिंह हैं, के नंबर भी शामिल किए गए थे।

राजेश्वर सिंह का कार्यकाल काफी उठापटक भरा रहा है। हाई-प्रोफाइल मामले संभालने के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दावा किया गया था कि सिंह ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसके जवाब में सिंह ने रजनीश कपूर नामक याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मानहानि याचिका दायर किया और कहा कि उन्होंने जांच में बाधा पहुंचाने के लिए पीआईएल दायर की थी।

वैसे तो उच्चतम न्यायालय ने साल 2014 में राजेश्वर सिंह के खिलाफ याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन जून 2018 में न्यायालय ने ईडी अधिकारी की जांच के लिए सरकार को हरी झंडी दे दी। ये वही समय है जब सिंह ने तत्कालीन राजस्व सचिव हसमुख अधिया को पत्र लिख कर नाराजगी जाहिर करते हुए उन पर ‘शत्रुता’ का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद अधिकारी उनके प्रमोशन में अड़चन डाल रहे हैं।

राजेश्वर सिंह को तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का करीबी माना जाता था। अक्टूबर 2018 में सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद के समय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सिंह पर आरोप लगाया था कि उन्होंने तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ माहौल बनाने का काम किया है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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