Monday, December 6, 2021

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सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन की कमी, प्राइवेट अस्पतालों में 83 प्रतिशत वैक्सीन का इस्तेमाल ही नहीं हुआ

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देशभर में वैक्सीन की भारी कमी के बीच प्राइवेट अस्पतालों में 83% प्रतिशत स्टॉक बचे होने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। हेल्थ मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने निजी अस्पतालों ने अपने वैक्सीन की स्टॉक में से केवल 17% डोज का ही इस्तेमाल किया था।

हेल्थ मिनिस्ट्री की 4 जून को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, मई माह में देशभर में वैक्सीन की कुल 7.4 करोड़ डोज उपलब्ध कराई गई थीं, जिसका 25 प्रतिशत यानि 1.85 करोड़ डोज प्राइवेट अस्पतालों के लिए तय की गईं। प्राइवेट अस्पतालों ने इसमें से 1.29 करोड़ डोज की खरीदी की, लेकिन उन्होंने केवल 22 लाख डोज का ही इस्तेमाल किया। यानी मई में इनके पास 1.07 करोड़ डोज का स्टॉक मौजूद था। जो कि प्राइवेट अस्पतालों को मिले कुल वैक्सीन स्टॉक का 83 % है। 

केंद्र सरकार ने शनिवार 12 जून को कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को अब तक 25.87 करोड़ से अधिक वैक्सीन की डोज सप्लाई की गई है। इसमें से 24.76 करोड़ टीके का इस्तेमाल किया जा चुका है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.12 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध हैं।

केंद्र सरकार के मुताबिक, वैक्सीन की 10.81 लाख से ज्यादा खुराक प्रोसेस में हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्रदान कर दी जाएंगी।

नहीं हैक हुआ Cowin पोर्टल, डेटा सुरक्षित

सरकार ने CoWin पोर्टल को हैक करने और आंकड़े लीक होने के दावों को कल शनिवार को खारिज करते हुए इसे निराधार बताया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम CoWin प्रणाली को कथित तौर पर हैक करने के मामले की जांच कर रही है।

वहीं पूरे मामले में वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन के इम्पावर्ड ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आरएस शर्मा का कहना है कि ‘को-विन’ प्रणाली को कथित तौर पर हैक करने और आंकड़े लीक होने से संबंधित डार्क वेब पर तथाकथित हैकरों के दावे निराधार हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर आवश्यक कदम उठाते रहेंगे कि ‘को-विन” पर लोगों के आंकड़े सुरक्षित रहें। को-विन पोर्टल कोविड-19 टीकाकरण अभियान का अहम हिस्सा है।

कैबिनेट का फैसला- ब्लैक फंगस की दवा टैक्स फ्री, कोरोना वैक्सीन पर कोई राहत नहीं 

कल शनिवार को वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 44वीं बैठक हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि बैठक में ब्लैक फंगस की दवाओं पर टैक्स को खत्म करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा कोरोना से जुड़ी दवाओं और एंबुलेंस समेत अन्य उपकरणों पर भी टैक्स की दरों में कटौती की गई है। बैठक में कोविड की वैक्सीन पर 5% GST को जारी रखने का फैसला किया गया है। GST दरों में यह कटौती सितंबर तक लागू रहेगी।

कोविड-19 रोधी टीकों पर कर नहीं घटाने के जीएसटी परिषद के फैसले को ‘‘जन विरोधी” बताते हुए पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने शनिवार को आरोप लगाया कि जब उन्होंने आपत्ति दर्ज़ कराने की कोशिश की तो उनकी आवाज़ दबा दी गयी। जीएसटी परिषद ने शनिवार को कोविड-19 के उपचार में इस्तेमाल होने वाली रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब जैसी दवाओं के साथ ही चिकित्सीय ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सांद्रकों पर कर की कटौती की लेकिन टीकों पर कर घटाने की मांग को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। 

मित्रा ने बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा, ‘‘जीएसटी परिषद द्वारा हमारी आवाज़ को दबाने का यह बिल्कुल जनविरोधी फैसला है. जन प्रतिनिधि होने के नाते इस कठोर फैसले को उचित ठहराने का हमारे पास कोई रास्ता नहीं है.” इन फैसलों के खिलाफ अपनी ‘‘असहमति” दर्ज कराते हुए मित्रा ने कहा कि उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराने की भरपूर कोशिश की लेकिन बैठक खत्म होने लगी और डिजिटल बैठक के लिए लिंक भी टूट गया. मित्रा ने यह भी आरोप लगाया कि कोविड -19 से लड़ने के लिए आवश्यक सामग्री पर जीएसटी के संबंध में दो रचनात्मक विकल्पों के उनके सुझावों पर भी ध्यान नहीं दिया गया। 

(सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं।)

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