Tuesday, October 26, 2021

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आखिरी वक्त में भी हाथ उठाकर बंधी रही चितरंजन भाई की मुट्ठी!

चितरंजन भाई अपने गांव लौट गए थे। कुछ महीने पहले। ग्राम सुल्तानपुर, तहसील बांसडीह, जिला बलिया, घाघरा का कछार और दियारे के एक कोने में ऊंचाई पर टिका गांव। चितरंजन भाई अपने जीवन का वृत्त पूरा कर रहे थे। सोचने...

स्मृति शेष: ‘जुल्म और दमन के खिलाफ इंसाफ और लोकतंत्र की निर्भीक आवाज थे भाई चितरंजन सिंह’

आदरणीय चितरंजन भाई से अभी 10 अक्टूबर को टॉउनहाल बलिया में बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई थी। PUCL के साथियों द्वारा जय प्रकाश जी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम का अवसर था। उन्हें बेहद अस्वस्थ देखकर धक्का लगा था।...

ओह, विदा चितरंजन भाई!

जीवन की इतनी ही सीमा होती है। चितरंजन भाई भी आज छोड़ गए। वे एक भव्य इलाहाबादी विभूति थे। हमारे लिए एक ज्वलंत वैचारिक ज्वाल! हालांकि मैं कभी भी उनके संगठन में नहीं रहा फिर भी उनका स्नेह सदैव...

नहीं रहे जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता चितरंजन, बलिया में ली आखिरी सांस

बलिया/नई दिल्ली। देश के जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता, जनवादी चिंतक व स्वतंत्र पत्रकार चितरंजन सिंह का आज निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक चितरंजन सिंह लम्बे समय से बीमार थे और आखिरी दिनों में कोमा...
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में रिश्वत के दोषी पाए गए एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश की फाइल पर चार साल से कार्रवाई नहीं

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल भले ही राजनेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों के समयबद्ध निपटान का संकल्प व्यक्त किया...
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